A Beautiful Bird on a Tree

दोस्तों , आज मेरी ७ वर्षीय बिटिया गुनगुन ने मुझे एक अनमोल गिफ्ट दिया वह उसकी लिखी पहली कविता … मुझे अक्सर कुछ लिखते देखकर शायद उसको लिखने की प्रेरणा मिल गयी है ..उसकी गलतियों की परवाह न करते हुए मैंने उसे यहाँ अपने ब्लॉग में जगह देने की कोशिश की है ..आपको उसका यह प्रथम प्रयास अच्छा लगेगा और उसकी कोशिश को सराहते हुए उसको आगे बढ़ने की आपसे प्रेरणा मिलेगी …… “A beautiful bird on a tree, On

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जब जागा था तब सोया था

दोस्तों , आज की कविता है……… “जब जागा था तब सोया था” जब जागा था तब सोया था …. जब उठा तो रोया था रिश्तो की पहेली में उलझने से पहले जब खुद से मिला तो खोया था…. बंदिशे तब भी थी अब भी हैं तन्हाई तब भी थी अब भी है बस यादों का समंदर लिए हर रोज हर पल पलकों पर ढोया था…. अधूरे ख्वाब तब भी थे अब भी हैं बस वक़्त की बस्ती में एक दिन

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चाँद अपने पथ पर

दोस्तों , आज मैं लाया हूँ फिर अपनी कविता “चाँद अपने पथ पर “…….२२/०७/१९९७ को लिखी यह कविता यहाँ पहली बार प्रकाशित हो रही है .. चाँद अपने पथ पर रोज चाँद अपने पथ पर रात के साये में है आता लिए चाँदनी की चादर धरा पे शीतलता फैलाता मंद -२ अपनी ही लय में चुपचाप गुजर है जाता फिर अगली रात वही क्रम है दोहराता बेचारी है रात सुख दुःख में देती है साथ पर उसको क्यों वह दूर

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क्या किसी ने सोचा मेरे बारे में

दोस्तों , आज लाया हूँ अपने दोस्त “शार्दूल सिंह -इलाहाबाद” की कविता जो कुछ अनछुए पहलुओ का उजागर करती है , आप भी पढ़िए .आइये हम उस किरदार को समझने का प्रयास करते है जिसका बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया गया है..शीर्षक है “क्या किसी ने सोचा मेरे बारे में” यह कविता उस समाज पर ,उसकी तकियानूसी ख्यालात पर कुठाराघात करती है जहाँ आज भी नारी का शोषण बदस्तूर जारी है …….   क्या किसी ने सोचा मेरे बारे में

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मैं लिखना चाहता हूँ

प्रिय पाठक , आज मैं लाया हूँ आपके लिए १६ जून २००३ की लिखी मेरी कविता ” मैं लिखना चाहता हूँ “….अपना आशीर्वाद इस कविता को भी दीजिये………… मैं लिखना चाहता हूँ मैं लिखना चाहता हूँ मस्तिष्क में कुछ तूफ़ान उठा है मन सागर में लहरें जागीं है दिल में कुछ बेचैनी है आँखों में कुछ तस्वीरें हैं मैं उन तस्वीरों को लिखना चाहता हूँ कहीं से कुछ सदायें आई हैं कहीं बादल भी बरसे हैं कहीं पे आग लगी

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जिंदगी कट गयी थी

प्रिय पाठक गण , कविता कहाँ से जन्म लेती है यह नहीं पता मुझको जो कलम ने लिखाया वही लिखा हमने …………………….. आज आपके समक्ष एक कविता रख रहा हूँ जिसका शीर्षक है “जिंदगी कट गयी थी ” …..आप अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर रखियेगा ..मुझे इन्तजार रहेगा हमेशा की तरह ……………………. जिंदगी  कट  गयी  थी अफवाहों  की  परवाह  न  करते  हुए  वो  बेबस  बैचैन  सी किताबों  के   अंदर  पन्ने   पलटते  हुए  कुछ  जिंदगी  से  ठगा  सा  महसूस  करते 

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