Corrupt truth:भ्रष्टतम सत्य

दोस्तों ,

एक सच्चाई से रूबरू करना चाहता हूँ ,अभी हाल में ही एक यात्रा के दौरान इतने अनुभव साझा हुए जिनको मैं आपको भी बताना चाहता हूँ …बानगी देखिये ….

भारतीय रेलवे के गरीबरथ का  AC ३ कोच ….मध्यप्रदेश के सहडोल स्टेशन से दो लोग बोगी संख्या  G6 में चढ़ते हैं ..दोनों की आपस में की गयी वार्ता का सारांश देखिये …

पहला यात्री : यार यही बैठो… आज कौन टी टी ई हैं… शर्मा होगा…१०० रुपया लेगा …बाँदा तक तो हो ही जायेगा ..आगे की देखेंगे …

दूसरा यात्री : नहीं यार ,कटनी का रेट २० रूपये है ,सतना का ५० लेते हैं .बाँदा का १०० लेगा ..यही रेट है भाई साहेब …हम लोग तो ऐसे ही जाते हैं …(सभी सरकारी कर्मचारी  RI department) …

कुछ देर बाद : पहला यात्री : साहेब को यहीं बुला लो

दूसरा : कौन साहेब ,

पहला यात्री : अरे अपने sdm साहेब ..वो भी आज चल रहें हैं ..वहां अकेले बैठे हैं ..

कुछ देर के बाद : साहेब आ गए …दोनों के बीच में विराजमान हो जाते हैं

साहेब : तुम लोग अकेले -२ यहाँ बैठे हो ? टी टी ई आया था क्या ?

पहला यात्री : अभी नहीं आया ..आएगा तो १०० rs  ही तो लेगा …

साहेब : जानता हूँ …पहली बार थोड़े ही जा रहा हूँ …

अगले कुछ मिनटों के बाद टॉपिक चेंज —

पहला यात्री : साहेब का मकान यही पर है ..जब यहाँ पोस्टिंग  थी तो यहाँ भी बनवा लिए ….साहेब अकेले ही यहाँ रहते थे ….

अब किराये पर दे दिए हैं …

दूसरा यात्री : अच्छा ..बहुत बढ़िया …साहेब आपने तो उसको  ( दूसरे sdm रैंक के अधिकारी  को ) ठिकाने लगा ही दिया …

पहला यात्री : साहेब ऐसे ही हैं ..कम बोलतें हैं लेकिन …पहले उसको बोला था की आधा -२ कर लो ..फाइल साहेब के पास भी आने दिया करो ..लेकिन मानता नहीं था ..उसको यह भी बोला की अपना हिस्सा रख के दे दिया करो ..लेकिन अकेले -२ ही खाने की आदत हो गयी थी …नहीं माने तो कलेक्टर साहेब से कहकर किनारे ही करवा दिया …..

साहेब : (हँसते हुए ) यार तुम लोग बदनाम कर दोगे….

दूसरा यात्री : अरे नहीं साहेब ..आज कल हर डिपार्टमेंट का यही हाल है कोई बाटकर खाना नहीं चाहता ..अकेले ही सब माल हड़पना चाहते हैं ….

साहेब : चलो यार ये सब छोडो ..बताओ आजकल कहाँ  हो ? दूसरे यात्री से …

दूसरा यात्री : साहेब क्या बताएं ,कटनी में फसें हैं …आप वहीँ बुला लो न ..मजा आ जायेगा ..आप तो जानते ही हैं कितना आपके लिए काम किया था ..घरेलु संबंध बन गए थे … End .

यह सिलसिला लगातार चलता रहा ..सभी अपने गंतव्य पर उतर गए …(बिना टिकट )….

दूसरी कहानी :

अगले स्टेशन पर :

टी टी ई का आगमन  होता है :कई लोग हाथ में १०० -५० का नोट लेकर खड़े हो जाते हैं …कोई जगह की मांग करता है …

टी टी ई महोदय उदार चरित्र से सबसे रूपये लिए पॉकेट में डाले ..और चलते बने …रात्रि 8 बजे का वक़्त …

 जाते -२ एक यात्री टी टी ई से – साहेब आप कहाँ तक चलेंगे ?

टी टी ई – घबराने की जरुरत नहीं है ..अगले टी टी  ई को बोल दूंगा …आप ५० रूपये दे दीजियेगा …ऊपर तक जाता है कोई बात की चिंता मत कीजिये …

यात्री : ठीक है साहेब ध्यान दीजियेगा

टी टी ई – ४७ no  खाली है जाके आराम से सो जाइये ….

टी टी ई के जाने के बाद – एक यात्री दूसरे साथी से –  इस टी टी लोगों की कमाई बहुत है ..रोज ५००० -७००० बना ही लेते हैं …तनख्वाह अलग से …

साथी यात्री : हाँ भाई अपने बेटे को टी टी ई ही बनाना है मैंने तो सोच लिया है ….End दूसरी कहानी का

अगले किसी स्टेशन पर दो वर्दी धारी  चढ़ते हैं : रात 1 बजे के आसपास …(ट्रेन कहीं यु पी में है )..कोहरे की वजह से पता नहीं चलता …)

आइये यहीं बैठ लेते हैं दो स्टेशन तो जाना है …( आरक्षित सीट के यात्री से )..भाई साहेब उठो कितना सोओगे …जरा बैठने दो… दो स्टेशन का सफर है  …

आरक्षित सीट का  यात्री- (मुँह बनाकर )…वर्दी के रौब से उठकर बैठ जाता है

पहला वर्दीधारी – आजकल पोस्टिंग के लिए बड़ा देना पड़ रहा है …

दूसरा : मत पूछो यादव जी …कप्तान साहेब सीधे ही मांग ले रहे हैं ..उनको भी ऊपर तक देना है …..जो थाना चाहिए उस हिसाब से रेट लग रहा है …वसूली भी करनी है ….टाइम भी कम है …आचार सहिंता के बाद वो भी मुश्किल हो गया है …जेब से देना न पड़ जाए …

यह बातचीत लम्बी चली ..१० मिनटों का सफर पुरे तीन घंटे चला …. इस दौरान आरक्षित सीट के   यात्री का मुहं देखने लायक था ….End  तीसरी कहानी का…..

एक और बात चीत का सारांश देखिये :

पहला यात्री दूसरे से : मुकदमे के लिए गए थे ..वकील दौड़ा रहा है ..एक सीधा सा मुकदमा था ..अब फंस गए हैं …चार साल से दौड़ रहा हूँ…वकील को पैसा चाहिए …थानेदार को पैसा चाहिए …बाबू को कागज के लिए पैसा चाहिए ..भगवान सब कुछ दे ..कोर्ट कचहरी न भेजे …

दूसरा :  मिश्रा जी ,कौन सा विभाग है जहाँ पैसे बिना काम  हो जायेगा ..

पहला : कोई नहीं …नेता को पैसा चाहिए ..दे के पीछे पीछे घूमते रहो ..नीच है सब के सब …अफसर को चाहिए …बाबुओं का तो पूछो मत ….साहेब से बड़े साहेब हैं ये ….बिना दलाली के कोई काम  नहीं होता …आम आदमी क्या करे ?

End चौथी कहानी का

एक और बानगी देखिये :

साहेब प्रभारी तहसीलदार बने हैं ..खूब जमीन का कारोबार फल फूल रहा है …

पहला आदमी : खूब जमीन हथिया लिया है साहेब ने यहाँ …

दूसरा : पता है यार ..खरीदा थोड़े ही है ..सभी मुकदमो को खंगाल लिया है …एक प्रधान को दलाल बना लिया है ..दोनों पक्षों को समझाया  जाता है  सुलह कर लो ..लड़ाई में कुछ नहीं हाथ लगेगा …एक आदमी टांग अड़ा देता है …दलाल समझाता है साहेब से मेरी पहचान है मैं काम करवा दूंगा ..मुझको कुछ मत देना लेकिन साहेब को कुछ जमीन दे देना इसमें से ….bus इस तरह   से साहेब का क्षेत्रफल बढ़ता जा रहा है ..साहेब के पास प्लाट की भरमार है ….

End पांचवी कहानी का

दो आदमी जो पोस्ट ऑफिस में काम करते हैं :

पहला : बहुत आमदनी बढ़ गयी है तेरी ..पार्टी कब मिलेगी ?

दूसरा : कहाँ यार ,जितना दिया है उतना वसूल तो लूँ ….

End छठीं कहानी का.

पहला यात्री : आजकल प्रधान जी खूब गाडी बदल  रहें हैं ….आजकल भाव भी बढ़ गया है

दूसरा : हाँ यार , औरत के नाम पर खूब कमाई कर रहा है …औरत प्रधान है और खुद प्रधानी करता है …चोर कहीं का ..

  (एक बानगी और )- गावं की चौपाल पर -(एक बुजुर्ग ) यु पी में सड़कों का बुरा हाल है ..अरे भाई इतना पैसा इंजीनियर खा जाता है …कांट्रेक्टर खा जाता है …नेता सब चोर हैं …कमीशन खोरी खूब है …मंत्री , cm सब का बंधा हुआ है ….सड़क कहाँ से बनेगी ???

एक रेलवे स्टेशन – तत्काल टिकट के लिए लाइन लगी है ..खिड़की खुलने से पहले शुरू के पांच छ लोग (दलाल के गुर्गे )..शिफ्ट वाइज सुबह तीन बजे से लाइन में लगे हैं ….महज कुछ पैसो के लिए …खिड़की खुलने से ठीक पहले दलाल आता है ..पहले से लिखी हुई पर्ची लगा दिया जाता है जिस पर उनका नाम पहले से दर्ज है ..गौर करने की बात यह है की यह पर्ची रेलवे द्वारा नहीं दलालों द्वारा लगाई जाती है ..जिसकी जानकारी सबको होती है ..और सबको मानने के लिए मजबूर किया जाता है …दर्शाया जाता है की कितनी ईमानदारी से लाइन लगी हुई है ..फिर टिकट खिड़की खुलने से कुछ देर बाद ही तत्काल का कोटा ख़त्म …रही सही कसर रेलवे कर्मचारी यानी टिकट बाबू निकाल देते हैं जब टिकट का ठेका उनके पास भी होता है ….

आपको जानकर हैरानी नहीं होनी चाहिए की विश्व के भ्रष्ट देशों की सुची में भारत को ३८ अंक प्राप्त हुए है जहाँ अपने पडोसी देश को ३६ अंक जो हमसे ज्यादा भ्रष्ट है …हर वस्तु यहाँ दलालों द्वारा उपलब्ध करायी जा सकती है ….बस आपको सुविधा शुल्क देना पड़ता है …चाहे वो पैन कार्ड हो , गैस  कनेक्शन लेना हो ,FIR दर्ज करवानी हो ,नाम डलवाना है ,ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो, राशन कार्ड बनवाना हो ,लोन लेना हो ,बिजली का बिल ठीक करवाना हो ,नया कनेक्शन लेना हो ,पानी का बिल आया हो ,नगर निगम में किसी भी प्रकार का कार्य हो ,कलेक्ट्रेट का कार्य हो ,न्यायालय का कार्य हो ,पटवारी दुनिया का सबसे भ्रस्ट आदमी में शुमार है ,ट्रैन में यात्रा करनी हो , बस चाहिए ,स्कूल का सर्टिफिकेट बनवाना हो ,मार्कशीट  पर नंबर चाहिए, स्कूल में बिना टूशन के मार्क्स चाहिए , डॉक्टर बनना हो ,इंजिनियर बनना हो ,यूनिवर्सिटी का कोई काम हो , किसी भी सरकारी दफ्तर का कोई भी कार्य हो बिना चढ़ावा कुछ भी नहीं होता ,इस बात का challange आप स्वयं लें ….किसी भी डिपार्टमेंट में नौकरी हो ,पेंशन चाहिए , मृत्यु का सर्टिफिकेट बनवाना हो ,  पीएफ फण्ड  निकलवाना हो …

आपको पता है यहाँ ५००० करोड़ का यादव सिंह जैसे इंजिनियर भी है , नल की टोंटी चुराने वाला बिलासपुर का प्रोफेसर भी है ,एक लाख करोड़ का नेता राजा भी है , कलमाड़ी भी है , मध्यप्रदेश का ४०० करोड़ का बाबू भी है ,२०० करोड़ का थानेदार भी है ,५०० करोड़ के आईएएस पतिपत्नी भी हैं …१००० करोड़ का बाबा भी है … लोगों के दसबंध वाला समोसे  चटनी का   बाबा भी  है, ५ करोड़ का चपरासी भी है ,

आप सब जानते हैं लिस्ट  हमारी जिंदगी से भी लम्बी है ….यही देश दुनिया की सच्चाई है .कड़वी सच्चाई …समाज सुधार से पहले हमे बदलना होगा ….इस बुराई को निकलने में कई सौ साल भी लग सकतें हैं ..और यह भी सच है यह ख़त्म नहीं हो सकता ….परन्तु फिर भी हम बदलेंगे तो युग बदलेगा …………

इस लेख को प्रस्तुत करने का उद्देश्य यह है की आप को पता तो चले कितनी गहराई तक भ्रष्टाचार ने अपने पैर जमा लिए हैं …..

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Santosh Pandey

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