पाँच तरीके से लिखी गई पाँच पुस्तकें

दोस्तों , आज आपके समक्ष रख रहा हूँ श्रीमती मिताली गोयल जी द्वारा ईमेल की गयी कुछ नयी जानकारी जो आप सब को भी पता होना चाहिए …श्री पीयूष गोयल द्वारा किया गया प्रयास एक अद्भुत योग्यता का प्रतीक है मैं इस पोस्ट के माध्यम से इनके किये गए प्रयास की सराहना करता हूँ तथा इनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ …
दोस्तों , इनके द्वारा रचित ये पुस्तकें कला की बेहद बेजोड़ कृतियाँ हैं आप भी इनके कार्य को सराहें इसी आशा के साथ प्रस्तुत है

पाँच तरीके से लिखी गई पाँच पुस्तकें

उल्टे अक्षरों से लिख गई भागवतगीता ( Bhagwat Gita )

आप इस भाषा को देखेंगे तो एक बार गी भौचक्के रह जायेंगे। आप को समझ में नहीं  आयेगा कि यह किताब किस भाषा शैली में लिखी हुई है। पर आप जैसे ही दर्पण ( शीशे‌  ) के सामने पहुंचेंगे तो यह किताब खुद-ब-खुद बोलने लगेगी। सारे अक्षर सीधे नजर आयेंगे। इस मिरर इमेज किताब को पीयूष ने लिखा है । मिलन सार पीयूष मिरर इमेज की भाषा शैली में कई किताबें लिख चुके हैं।

सुई से लिखी मधुशाला ( Madhushala )

पीयूष ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है कि देखने वालों आँखें  खुली रह जाएगी और न देखने वालों के लिए एक स्पर्श मात्र ही बहुत है।  पीयूष ने पूछने पर बताया कि सुई से पुस्तकलिखने का विचार क्योंआया ? अक्सर मुझसे ये पूछा जाता था कि आपकी पुस्तकों को पढ़ने के लिए शीशे की जरूरत  पड़ती है । , आखिर बहुत  सोच समझने के बाद एक विचार दिमाग में आया क्यों न सूई से कुछ लिखा जाये सो मैंने सूई से स्वर्गीय श्री हरिवंशरायबच्चन जी की विश्वप्रसिद्ध  पुस्तक  ‘मधुशाला’ को करीब 2 से ढाई महीने में पूरा किया। यह पुस्तक भी मिरर इमेज में लिखी गयी है और इसको पढ़ने लिए शीशे की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि रिवर्स में पेज पर शब्दों के इतने प्यारे मोतियों जैसे पृष्ठों को गुंथा गया है, जिसको पढ़ने में आसानी रहती हैं और यह सूई से लिखी ‘मधुशाला’ दुनिया की अब तक की पहली ऐसी पुस्तक है जो मिरर इमेज व सूई से लिखी गई है।

मेंहदी कोन से लिखी गई गीतांजलि ( Gitanjali )

पीयूष ने एक और नया कारनामा कर दिखाया है उन्होंने 1913 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर की विश्व प्रसिद्ध कृति ‘गीतांजलि’ को ‘मेंहदी के कोन’ से लिखा है। उन्होंने 8 जुलाई 2012 को मेंहदी से गीतांजलि लिखनी शुरू की और सभी 103 अध्याय 5 अगस्त 2012 को पूरे कर दिए।इसको लिखने में 17 कोन तथा दो नोट बुक प्रयोग में आई हैं। पीयूष ने श्री दुर्गा सप्त शती, अवधी में सुन्दरकांड, आरती संग्रह, हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में श्री साईं सत्चरित्र भी लिख चुके हैं। ‘रामचरितमानस’ ( दोहे, सोरठा और चौपाई ) को भी लिख चुके हैं।

कील से लिखी ‘पीयूषवाणी’

अब पीयूष ने अपनी ही लिखी पुस्तक ‘पीयूषवाणी’ को कील से ए-फोर साइज की एल्युमिनियम शीट पर लिखा है। पीयूष ने पूछने पर बताया कि कील से क्यों लिखा है ? तो उन्होंने बताया कि वे इससे पहले दुनिया की पहली सुई से स्वर्गीय श्री हरिवंशरायबच्चनजी की विश्व प्रसिद्ध पुस्तक ‘मधुशाला’ को लिख चुके हैं । तो उन्हें विचार आया कि क्यों न कील से भी प्रयास किया जाये सो उन्हों ने ए-फोर साइजके एल्युमिनियम शीट पर भी लिख डाला।

कार्बन पेपर की मदद से लिखी ‘पंचतंत्र’ ( Carbon paper written ‘Panchatantra’ )

गहन अध्ययन के बाद पीयूष ने कार्बन पेपर की सहायता से आचार्य विष्णुशर्मा द्वारा लिखी ‘पंचतंत्र’ के सभी ( पाँच तंत्र, 41 कथा ) को लिखा है। पीयूष ने कार्बन पेपर को (जिस पर लिखना है) के नीचे उल्टा करके लिखा जिससे पेपर के दूसरी और शब्द सीधे दिखाई देंगे यानी पेज के एक तरफ शब्द मिरर इमेज में और दूसरी तरफ सीधे।

  श्रीमती मिताली गोयल जी और श्री पीयूष गोयल की जी को धन्यवाद ,मुझसे इस प्रकार की जानकारियों को मेल द्वारा शेयर करने के लिए ..मुझे भी अपार ख़ुशी होती है जब आपकी आशाये पूर्ण होती हैं …
प्रिय पाठकों ,आपके पास भी यदि कोई उम्दा जानकारियां हों या कुछ नया पोस्ट आप भी लिखना चाहतें हो तो मुझे अवश्य मेल द्वारा सूचित/ शेयर करें ..मैं आपके द्वारा प्रेषित विचारों और लेखों को प्रकाशित करने का प्रयास करूँगा और हाँ आपके लेख हिंदी में टाइप किये गए हों इस बात का ख्याल रखियेगा …एन्जॉय योर सक्सेस

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Santosh Pandey

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