कलियुग का देवता

दोस्तों
आज की कविता का शीर्षक है “कलियुग का देवता ”
इस शीर्षक में वह सब है जो आपको आपके लक्ष्य को प्राप्त होने का शार्टकट दिखायेगा परन्तु बचना होगा इस शार्टकट रूपी कलियुग के देवता से …..
हर कोई इससे दूर तो रहना चाहता है परन्तु छोड़ना नहीं चाहता ……आइये जानते है इसे क्या है ये …

कलियुग का देवता

जन्मा कब वह
कौन हैं माँ -बाप
सवाल है उर का
किसने किया लाचार
कलियुग का देवता है भ्रष्टाचार
या कोई अभिनेता है भ्रष्टाचार
या फिर समाज का नेता है भ्रष्टाचार
कुछ देता भी है या

सब कुछ लेता है भ्रष्टाचार

कोई घोटाला है भ्रष्टाचार
या कोई पाठशाला है भ्रष्टाचार
जन जन में फैला भ्रष्टाचार
आज है कण-कण में भ्रष्टाचार
सर्वविदित सर्वव्याप्त है भ्रष्टाचार
कोई बीमारी है भ्रष्टाचार
की महामारी है भ्रष्टाचार
या फिर सरकारी है भ्रष्टाचार
आखिर कौन है ये भ्रष्टाचार
जो खाए जा रहा है समाज को
समाये जा रहा है समाज को
अंत है या अनंत है भ्रष्टाचार
कोई मिसाइल है भ्रष्टाचार
या कोई फाइल है भ्रष्टाचार
हे भ्रष्टाचार! तेरी महिमा है अपार
दीमक की तरह चाट रहा है
सभ्यता
संस्कृति
मानवता को
पाट रहा है भ्रष्टाचार
“अकाल है भ्रष्टाचार महाकाल है भ्रष्टाचार
प्रलय का नौनिहाल है भ्रष्टाचार II

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