नेताजी की मचं हर्षिय योजनायें

दोस्तों ,

आज फिर नेता जी की कथा लेकर हम आये हैं …….पढ़िए और विचार कीजिये

 

नेता जी कमरे मे वीड़ियो गेम खेल रहे होते है,तभी उनका बफादार……….हॉफते हुए कमरे मे प्रवेश करता है, अब यहॉ बफादार का मतलब जीभ निकालकर हॉफने वाले से न लगा लेना, मगर नेता जी के सामने कदर उसकी हॉफने वाले जैसी ही है| खैर छोडिये बाकी आप सब समझदार है|
नेता जी गेम मे ज्यादा व्यस्त रहते है  यदि  बीच मे दखलदांजी हो जाऐ तो साउथ के विलेन बन जाते है, चारो तरफ खामोशी छा जाती है, वजह ? उनकी दहाड़! परन्तु दहाड़ भी बिना दाढ़ी के उन पर सूट नही करती और यदि दाढ़ी रख भी ले तो गाडी़ मे ताडी़ लगाये बाबा लगते है | बडी विड़म्बना है परिस्थतियो की नेता जी के साथ, सूट पहन ले फिर भी सूट ही नही करती |
किसी ने नेता जी से पूँछा,” आप राजनीति मे कैसे सकिृय हुए?
नेता जी ने स्टाइल मे अपना दॉया पैर बॉये पैर पर रखकर बड़े अदांज में जवाब दिया-” एक दिन ऐसे ही सोते- सोते दिल मे तमन्ना जाग पडी़ चले आये उठकर राजनीति करने|”
प्रश्नकर्ता भी बिरले किस्म का था बोला- ” उस दिन आप जरूर कुल्ला नही किये होगें, तभी इतनी दुर्गन्ध आती है राजनीति मे|”
चुनावी जीत से पहले रैलियो मे खुब गला फाड़कर विकास कार्यो का रैला फैलाया , पॉच साल होने को आये मजाल है कि दर्शन हो जाये | फिर भी जनता आस्था की मुरीद है कर लेगी सबर दिल पे ईट रख के |
नेता जी को सूचना मिलती है,शहर के बाहर एक गाँव मे आग लग गई है | नेता जी का सलाहकार आता है -” नेता जी यह वही गॉव है जहॉ आपने विकास कार्यो की पुलद्दी खोली थी जिसकी वजह से आपको वोटो की बारिस हुई, उसके बाद आपने अभी तक शक्ल नही दिखाई है| चलो ऐसे मे अपनी हमदर्दी दिखा दोगें तो जनता पिछला भूल जाएगी|

वाणी मे मिस्री घोलते हुए ‘तकियॉ कलाम’नेता जी का हॉम बर्क कराता है| तकियॉ कलाम- नेता जीआपको वहॉ जाकर गॉव वालो के प्रति अपनी दु:खद सवेंदनाए व्यक्त करनी है उसके बाद …………….बात पुरी हो पाती की नेता जी को अपनी मानसिकता दुर्बलता पर सदेंह हुआ |
चपाक से बोल पडे़-” तुम हमको का बेवकूफ समझे हो, हम सब सभांल लूगां देखना तुम|”
चलो हमारी गाडी़ निकालो वरना क्रोध का व्यस्न छलक के तुम्हारे तन पर गिर गया तो नरक याद आ जाएगा|
तकियाँ कलाम भी बेचारा क्या करता,ये क्या कम था जूते को पॉलिस देने वाला सर की टोपी को सींच रहा है|
नेता जी घटनास्थल पर पँहुचते ही सामने लकड़ियाँ जलता देख खेद जताने लगे|
तकियॉ कलाम नेता जी को- आप क्या बोल रहे है वहॉ लड़की जली तड़प रही है और आप लकड़ी पर दु:ख जता रहे है|
नेता जी – मंच धुँए से हटकर लगाया है ना का है की हमार आँखे धुँआ सहन नही कर पाती ,एलर्जी है ना|
तकीयॉ कलाम- दो व्यक्ति धुँए मे दम घुटने की वजह से मर गये हमारे हिसाब से आपका मंच धुँए मे होता तो और अधिक अच्छा होता|
नेता जी दॉत मिसमिसाते हुए – अच्छा का है हम तुम्हे कोठी पर बतायेगें|
तकियॉ कलाम जी हुजुरी करते हुये- पूरी बात सुनिये यदि आप धुँए मे भाषण देते तो आपकी आँखो से पानी बहता|
नेता जी- हॉ बहता तो?
तकियॉ कलाम- जनता ई सोचती की हमारे दु:खो से दु:खी होकर आँसू बहा रहे है और हमारा काम पक्का|
नेता जी ने गर्दन हिला कर उसकी सहमती जताई ,तकियॉ कलाम के चहरे पे हिरयाली छा गई |
गॉव की जनता ने जब नेता जी को दौरा करते देखा तो सारी सुध-बुध भुलाकर मन मे उत्सुक्ता  लिए मंच के सम्मुख खड़ी हो गयी की चलो नेता जी आये है तो मदद की बूँदा- बॉदी तो जरूर होगी और आग मे दहक रहे आसियानो को आर्थिकता की मरहम, ठण्ड़क पँहुचाऐगी|
नेता जी सभी को दूर से हाथ जोडकर अभिनन्दन किया| तथा अपने मंच की कमान साधते हुए कुर्सी का लछ्य बाधकर योजनाओ पर निशाना साधा|
भावुकता के आँवर ढोग मे पहले ही वाक्य मे बोल पड़े- ” आग लगने पर कुएँ नही  खोदे जाते|”
जनता का सोया हुआ दर्द जाग गया,भीड़ के बीच से आवाज आई- तो क्या तेरी कब्र खोदे?
नेता जी ने सोचा हमारा वाक्य छक्का मारेगा, पर वो तो न्यूटन का तृतीय नियम बनकर प्रतिक्रिया(Reaction) कर
गया| नेता जी अपने दल की ओर इशारा करके कहॉ- “काफी जली हुयी  जनता है,क्या करू?”
सलाहाकार कान मे आकर फुसफुसा कर बोला- “ये  आप क्या बोल रहे है जनता तो भड़केगी,हॉमबर्क किया नही,कुछ बढाकर बोलो|”
नेता जी हॉ मे गर्दन हिलाते हुए बोले-” मै ही आपके दर्द को आपना दर्द मानता हूँ इसलिए मैने…… हमार मतलब मेरे लोग गॉव मे ट्यूबल लगवायेगें|”
पुन: जनता से आवाज आई-” उसी मे तेरे को डुबोकर मारेगें|”
नेता जी- ” हॉ आपका गुस्सा जायज है |”
फिर धीमे स्वर खुद मे बुदबुदाये – लगता है आज जनता निचौड देगी|
सलाकार बदन मे गर्मी लिए हुए बोला-” नेता जी! गॉव मे लाइट नही है इसलिए जनता मे करटं दौड़ रहा है| कोई माकूल जवाब दीजिए जिससे गॉव वाले आपकी भक्ति मे बह जाए|
नेता जी के चौपट दिमाक मे बहने से याद आया और तत्काल बिलबिलाती जनता पर बोले-” आप लोग चितां मत कीजिए  आपकी  समस्या मानो सुलझ गई| मै जानता हूँ !आपकी झुलसी हुई चमडी़ मे जो आग दहक रही है उसको ठण्डा़ करने के लिए मै अभी जिला मजिस्ट्रेड से कहकर नहर खुदवा देता हूँ|”
जनता के  सब्र का बॉध टूट गया और नेता जी पर टूट पडे़,इससे पहले नेता जी को जनता ‘हरण्यकश्यप’ का रोल करवाये नेता जी उससे पहले स्टेज के पीछे से निकल लियेे, और भागते- भागते बोले,अपुन को प्रहलाद वाला एक्सपीरियेन्स भी नही है |
गार्ड ने गाडी़ मे लिये तो जान मे जान आई, सामने देखा तो तकियॉ कलाम पहले से कुण्डली मारे बैठ है| इससे पहले नेता जी खोलते,तुरन्त पॉव………..
ये बात सही है कि नहर, पानी,बिजली,सड़क आदि पर याजनाएे बनाई जाती है मगर वो फाइलो मे अटक कर रह जाती है, बीच मे नेताओ के चमचे रूपी छटने लग जाते है जो राख की सारी खाक खा जाते है|
मेरे ब्लोग लिखने का मकसद यही था कि सरकार यदि “पंच बर्षिय योजनाएे बनाती है तो फिर मंच हर्षिय योजनाऐ बनने की नौवत क्यो आती है”||

आभार  :    विवेक पाठक

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दोस्तों ,इस ब्लॉग कैटगरी में प्राप्त  चयनित ब्लॉग्स का प्रकाशन किया जाता है ,यदि किसी के कॉपीराइट का उलंघन यहाँ त्रुटिवश हो रहा हो तो मेल करें यह ब्लॉग तुरंत हटा लिया जायेगा , ब्लॉग लेखकों से अनुरोध है अपनी मौलिक रचना ही भेजे . प्रकशित होने के बाद ब्लॉग का उत्तरदायित्व ब्लॉग Sender  का होगा क्रमशः   आपसे अनुरोध है “व्यक्तिक विकास ” विषय पर ही अपने ब्लॉग भेजे अब अन्य विषय स्वीकार नहीं किये जायेंगे…..धन्यवाद

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