हिंदी कहावतें 2017

दोस्तों , आज लाया हूँ आप के लिए हिंदी कहावतों का गुच्छा ….हमारी राष्ट्र भाषा हिंदी कितनी प्यारी है आइये देखते हैं और स्टूडेंट्स आप इनके सही अर्थ को समझें और बोलचाल की भाषा में इनका प्रयोग भी करें …
दोस्तों , १५ अगस्त आने वाला है …हिंदुस्तान का ७१वां स्वतंत्रता दिवस …..अपनी प्यारी भाषा और अपने देश दोनों पर गर्व करें ……

डिजिटल हिंदुस्तान में आपका स्वागत है ….सभी देशों के नागरिकों से अपील है आइये हमारे देश में …देखिये यहाँ की विरासत, संस्कृति ….आपको भी अपना लगेगा ….हमारा प्यारा हिंदुस्तान

 

 

हीरे की परख जौहरी जाने – गुण की परीक्षा गुणी ही कर सकता है
हाथ सुमिरनी, बगल कतरनी – ऊपर से सज्जन, भीतर से कपटी
हलवाई की दुकान, दादा का फातेहा – दुसरे के धन पर मौज करना 
ईंट का जवाब पत्थर – ठोस उत्तर
उलटा चोर कोतवाल को डाँटे – कसूरवार स्वयं कसूर पकड़नेवाले को डाँटे
ऊँट के मुँह में जीरा – जरूरत से बहुत कम
ऊँची दुकान फीका पकवान – सिर्फ बाहरी दिखावा
काला अक्षर भैंस बराबर – अक्षर ज्ञान से बिल्कुल शून्य
का बरखा जब कृषि सुखाने – अवसर बीत जाने पर साधन बेकार हो जाते हैं
खोदा पहाड़ निकली चुहिया – परिश्रम की तुलना में फल बहुत कम
जो गरजते हैं वो बरसते नहीं – जो बहुत बोलता हैं वह काम कम करता है
गुड खाये गुलगुले से परहेज – दिखावटी परहेज
गुरु गुड़ चेला चीनी – गुरु से चेला तेज
घर का भेदी लंका ढाहे – आपसी फूट सबसे बड़ी कमजोरी हैं
घर की मुर्गी दाल बराबर – सहज प्राप्त वस्तु को आदर नहीं मिलता
चोर की दाढ़ी में तिनका – दोषी हमेशा चौकन्ना रहता हैं
जिसकी लाठी उसकी भैंस – ताकतवर की जीत
जैसी करनी वैसी भरनी – जैसा काम वैसा फल
डूबते को तिनके का सहारा – असहाय के लिए थोड़ी सहायता भी काफी होती हैं
दूध का जला मट्ठा भी फूंक फूंक कर पीता है – एक बार धोखा खाने के बाद आदमी हमेशा सतक रहता है
देशी मुर्गी विलायती बोल – बेमेल
दूर के ढोल सुहावने – दूर की वस्तु के प्रति अधिक आकर्षण होता है
धोबी का कुत्ता घर का घाट का – किसी काम का ना रहना
नेकी और पूछ पूछ – भलाई करने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती
नौ की लकड़ी नब्बे खर्च – थोड़े फायदे के लिए अधिक खच
पाँचों औगुलियाँ घी में – चारों तरफ से लाभ होना
बन्दर क्या जाने आदी (अदरख) का स्वाद – मुर्ख गुण की यहचान नहीं कर सकता
बिल्ली के गले में घंटी – कठिन काम पूरा करना
भई गति साँप छुछुदर केरी – दुविधाजनक स्थिति
रस्सी जल गयी पर ऐंठन गयी – पतन होने के बाद भी घमंड
सौ चूहे खा के बिल्ली चली हज को – अत्यधिक पाप करने के बाद दिखावटी भक्ति
साँप भी मरा लाठी भी टूटी – बिना किसी नुकसान के काम बन जाना
हाथ कगन की अरसी क्या – प्रतक्ष्य को प्रमाण की आवशयकता नहीं होती
होनहार बिरवान के होत चीकने पात – होनहार के लक्षण बचपन से ही प्रकट होने लगते हैं
अंधे के हाथ बटेर – मूर्ख के हाथ मूल्यवान वस्तु
अंधे के आगे रोना – अन्यायी से न्याय माँगना
अकल बड़ी या भैंस – बुद्धि बल से बड़ी है
अटकल पच्चे डेढ़ सौ – निराधार जवाब
अपनी डफली अपना राग – सबका अपनी अपनी मर्जी से काम करना
अपना दही खट्टा कौन कहेगा – अपनी चीज सबको अच्छी ही लगती है
अशर्फियों की लूट कोयले पर छाप – मूल्यवान वस्तु को छोडकर तुक्ष वस्तु पर ध्यान देना
आप डूबे तो जग डूबा – बुरा औादमी सबको बुरा समझता है
आये थे हरिभजन को ओटन लगे कपास – पूर्वनिश्चित कार्य को छोड़कर अनिश्चित में लगना
इतनी सी जान गजभर की जबान – देखने में छोटा, लेकिन बात करने में तेज
उघरे अंत होय निबाहू – भेद खुलने पर दुर्गति निश्चित है
ऊँट किस करवट बैठता है – किसकी जीत होती है
ऊखल में सिर दिया तो मूसल से क्या डरना – कोई उत्तरदायित्व लेने के बाद बाधाओं से नहीं डरना
एकहि साधे सब सधे, सब साधे सब जाय – एकाग्रता से काम बनता है, अनेक ओर ध्यान देने से बिगड़ता है
ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती – अधिक कजूस होने से काम नहीं चलता
कबीरदास की उल्टी बानी, बरसे कबल भीजे पानी – उल्टा काम
कभी घृत घना, कभी मुट्ठी भर चना, कभी वह भी मना – हर स्थिति में संतुष्ट रहना
करघा छोड़ तमाशा जाय, नाहक मार जोलाह खाय – अपने दायित्व से भागनेवाला हानि उठाता है
कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा – इधर उधर से लेकर कोई वस्तु तैयार करना, मौलिकता का अभाव
कहाँ राजा भोज, कहाँ गंगवा तेली – छोटे की बड़े से तुलना नहीं हो सकती
काजल की कोठरी में धब्बे का डर – बुरी संगति का प्रभाव पडेगा ही
काठ की हाँड़ी दुबारे नहीं चढ़ती – छल कपट हमेशा सफल नहीं होता
काबुल में भी गधे होते हैं – मुर्ख हर जगह होते हैं
काम जो आवे कामरी, का ले करे कमाच – जिस चीज से काम बने वही अधिक महत्वपूर्ण है
कुत्ता भी पूँछ हिलाकर बैठता हैं – स्वच्छता सबको प्रिय है
कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं होती – दुष्ट अपनी दुष्टता नहीं छोड़ सकता है
कुत्ते को घी नहीं पचता – ओछा आदमी अच्छी बात भी नहीं पचा सकता
खग जाने खग की ही भाषा – जिनका जिस चीज से संबंध रहता है, वे ही उसके बारे बता सकते हैं
खरी मजूरी चोखा काम – पूरा देना और पूरा काम लेना
खेत खाय गदहा, मार खाय जोलहा – दोष कोई करे और दंड कोई दूसरा भोगे
गये थे रोजा छुड़ाने, गले पड़ी नमाज – एक विपति से बचने की चेष्टा में उससे भारी रिपति शों कसना
गाँव का जोगी जोगड़ा आन गाँव का सिद्ध – गुण की पहचान अपनों की अपेक्षा बाहरी लोग अधिक करते हैं
गुरु कीजै जान, पानी पीजे छान – कोई भी चीज अच्छी तरह जाँचकर लेनी चाहिए
बाजु में छोरा नगर में ढिंढोरा – जो पास में ही मौजूद हो उसे दूर खोजना
गीदड़ की जब शामत आती है तो वह शहर की ओर भागता है – मुसीबत मनुष्य को अपनी और खींचती है
घर में दीया जलाकर मस्जिद में जलाया जाता है – दूसरों को सुधारने से पहले स्वयं
घी का लड्डू टेढ़ा भी भला – गुणवान की शक्ल नहीं देखी जाती

अंधों में काना राजा – मूर्खों में अल्पज्ञ की प्रतिष्ठा
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता – अकेला आदमी कोई बड़ा काम नहीं कर सकता
अधजल गगरी छलकत जाय – थोड़ी विद्या या थोड़ा धन पानेवाला व्यक्ति धमडी होता हैं
अब पछताये होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गयी खेत – मौका चूक जाने पर पछताना बेकार हैं
आँख का अंधा गाँठ का पूरा – मूख धनी
आगे नाथ न पीछे पगहा – बिल्कुल स्वतंत्र, मनमानी करनेवाला, उछूखल
आधा तीतर आधा बटेर – पूरी तरह से किसी एक तरफ नहीं
आम का आम गुठली का दाम – सभी प्रकार से लाभ होना, दूना लाभ उठाना
आप भला तो जग भला – खुद अच्छा तो सभी अच्छे
आँख का अंधा नाम नयनसुख – गुण के विपरीत नाम
आसमान से गिरा खजूर पर अटका – एक मुसीबत से निकलकर दूसरी मुसीबत में पड़ना
आगे कुआँ पीछे खाई – चारों तरफ मुसीबत, दुविधा की स्थिति
घी खिचड़ी में ही गिरे – अपनी चीज अपने काम आयी
घर में भुनी भाँग नहीं, नगर निमंत्रण – मूर्खतापूर्ण दुस्साहस
चमड़ी जाय पर दमड़ी नहीं – भारी कजूस
चल गयी तो वाह वाह, रह गयी तो फकीरी – धन हाथ में आने पर अंधाधुंध खर्च करना और समाप्त हो जाने पर भूखों मरना
चोर चोर मौसेरा भाई – एक व्यवसायवाले आपस में मित्र होते हैं
चौबे गये छब्बे बनने दुबे बनकर लौटे – लाभ के लोभ में हानि
छुछुदर के सिर पर चमेली का तेल – अयोग्य के पास मूल्यवान वस्तु होना
छोटे मियाँ तो छोटे मियाँ बड़े मियाँ सुभान अल्ला – बड़ों में छोटों की अपेक्षा अधिक बुराई
जगल में मंगल – हर स्थिति में प्रसन्न रहना
जब नाचना है तो घूंघट कैसा – काम में लाज कैसा
जब तक साँस तब तक आस – अंतिम समय तक निराश नहीं होना
जल में रहकर मगर से बैर – जिसके अधीन रहना उससे वैर करना ठीक नहीं
जहाँ जाय रवि, वहाँ जाय कवि – कवि की कल्पना बड़ी तीव्रगामी होती है
जस दूलह तस बनी बरात – अपने जैसे सभी साथी
जहाँ मुर्गा नहीं बोलता, वहाँ क्या सवेरा नहीं होता – किसी के बिना कोई काम नहीं रुकता
जा को राखे साइयाँ, मारि सकिहें कोय – ईश्वर जिसका सहायक है, उसका कोई कुछ बिगाड नहीं सकता
जिन ढूँढा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ – परिश्रमी को सफलता मिलती है
जिसकी जूती उसी का सिर – अपनी ही वस्तु से हानि
जिस पत्तल में खाना उसी में छेद करना – कृतघनता
जैसा देश वैसा वेश – स्थान के अनुसार ही अपने आपको रखना चाहिए
जैसी बहे बयार तब तैसी पीठ आड़ – परिस्थिति के अनुसार नीति अपनानी चाहिए

नौ मन तेल होगा राधा नाचेगी – किसी काम को करने के लिए कठिन शर्त रखना
रहेगा बाँस बजेगी बाँसुरी – झगडे की जूड को समाप्त करना
नाच जाने आँगन टेढ़ा – अपने अज्ञान का द्वेष दूसरे पर मढ़ना
नाम बड़े पर दर्शन छोटे – गुण की अपेक्षा प्रशंसा अधिक
नीम हकीम खतरे जान – अयोग्य व्यक्ति से हानि होती है
नौ नगद तेरह उधार – अधिक उधार से थोड़ा नगद अच्छा होता है
पर उपदेश कुशल बहुतेरे – दूसरों को उपदेश देनेवाले बहुत हैं, स्वंय काम करनेवाले वाले बहुत कम
पांचो अंगुलियाँ बराबर नहीं होती – सभी आदमी एक जैसे नहीं होते
प्यासा ही कुआँ के पास जाता है – जिसे जरूरत होती है उसे ही चेष्टा करनी होती है
फुकने से पहाड़ नहीं उड़ते – बड़े काम छोटे उद्योग से नहीं होते
फल से लदी डाली नीचे झुक जाती है – गुणवान व्यक्ति विनम्र होता है
बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले भीख – अपना स्वाभिमान छोड़कर माँगने से अनादर होता है
बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा – अच्छा मौका मिलना
बीति ताहि बिसारि दे, आगे की सुध लेय – बीती हुई घटना पर पछताने के बदले भविष्य की चिंता करनी चाहिए
बैल का बैल गया, नौ हाथ का पगही भी गया – बहुत बड़ा घाटा, घाटा पर घाटा
भैंस के आगे बीन बजाये, भैंस बैठ पगुराय – पूर्ख पर उपदेश का कोई असर नहीं होता
मन चंगा तो कठौती में गंगा – मन की पवित्रता ही सबसे बड़ा पुण्य है
मरता क्या नहीं करता – निराश व्यक्ति सब कुछ कर सकता है
मलयगिरी की भीलनी चंदन देत जराय – सहज उपलब्ध वस्तु की कद्र नहीं होती
मान मान मैं तेरा मेहमान – जबर्दस्ती किसी पर दायित्व मढ़ना
मार के डर से भूत भागे – दुष्ट व्यक्ति दुष्टता से ही सीधे होते हैं
मानो तो देव नहीं तो पत्थर – विश्वास ही सबकुछ है
मियाँ की दाढ़ी वाहवाही में गयी – झूठी प्रशंसा में ही बर्बाद होना
मियाँ की जूती मियाँ के सिर – जिसकी करनी उसी की भरनी
मुख में राम बगल में छूरी – कपटी या धोखेबाज आदमी

झूठ के पाँव कहाँ – झूठा आधार हमेशा कमजोर होता है
टके की चटाई, नौ टका विदाई – लाभ से हानि अधिक होना
टेढ़ी अँगुली से घी निकलता है – सीधेपन से काम नहीं चलता
ठठेरे ठठेरे बदलौअल – धूर्त से धूर्तता
ढाक के सदा तीन पात – एक ही स्थिति में हमेशा रहना
तन पर नहीं लता, पान खाय अलबत्ता – झूठी शेखी बघारना
तुम डाल डाल मैं पात पात – किसी के दाव को अच्छी तरह समझना
तेते पाँव पसारिये जेती लम्बी ठौर – हैसियत के बाहर काम नहीं करना चाहिए
थोथा चना बाजे घना – ओछे लोग अधिक आडम्बर करते हैं
दाल भात में मूसलचद – अनधिकार दखल देना
दीवार के भी कान होते हैं – भेद खुलने के अनेक रास्ते हैं
दुधारु गाय की लात भी भली – जिससे फायदा हो उसकी झिड़की भी अच्छी लगती है
दूध का दूध पानी का पानी – निष्पक्ष न्याय
दोनों हाथ में लड्डू – दो तरफा लाभ
न ऊधो का लेना न माधो का देना – कोई लटपट नहीं
नक्कारखाने में तूती की आवाज – कमजोर के प्रति उदासीनता
नदी नाव का संयोग – दुर्लभ मिलाप
यह मुँह और मसूर की दाल – ऐसी वस्तु की चाह करना जिसे पाने की योग्यता नहीं हो
राम नाम जपना पराया माल अपना – कपट से दूसरे का धन हड़पना
लगा तो तीर नहीं तो तुक्का – निपट अंदाज से काम लेना
सब्र की डाल में मेवा फलता है – संतोष से लाभ होता है
समय पाय तरुवर फले, कतवो सीचे नीर – प्रत्येक काम एक निश्चित समय पर ही पूरा होता है
साँच को आँच कहाँ – सच को किसी का डर नहीं होता
सावन के अंधे को हरा ही हरा सूझता है – अमीर सबको अमीर समझता है
सुनिये सब की करिये मन की – सबका सुझाव लेना चाहिए, लेकिन वही करना चाहिए जिसे अपना मन स्वीकार करे
सीधे का मुँह कुत्ता चाटता है – अधिक सीधा होने पर लोग कष्ट देते हैं
सौ चोट सुनार की एक चोट लुहार की – कमजोर के अनेक अपराधों की सजा बलवान एक ही बार में दे देता है
सौ सयाने एक मत – बुद्धिमान लोग एकमत होकर काम करते हैं
हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और – कहने को कुछ करने को कुछ और

 

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