Who should be our Teacher ?

दोस्तों , आज स्कूल का माहौल और पढ़ाई का स्तर का ग्राफ नीचे की ओर गिरता जा रहा है इसमें सुधार की आवश्यकता लाने की जरुरत है, इसी कड़ी में आज समझने की कोशिश करते है ….

आज टीचर कैसा होना चाहिए या किस तरह के टीचर की हमे आवश्यकता है ,टीचर की उपयोगिता क्या है ,एक सक्सेसफुल टीचर किस तरह अपनी क्लास को हैंडल करता है ,स्टूडेंट्स के प्रति उसका नजरिया क्या है ,पढ़ाई के अलावा किस तरह बच्चो का साथ देता है ,यह बड़ा ही महत्वपूर्ण विषय है ,यह लेख विशेषकर टीचर्स के लिए है आप भी सोचिये इस विषय पर यदि आप एक अच्छे टीचर है ….

एक सामान्य क्लास में हर तरह के बच्चे होते हैं कोई तेज ,कोई सुस्त ,कोई अधिक ऊर्जावान ,कोई अति नेगेटिव thoughts के साथ …कोई बदमाश ,कोई सीधा साधा ..प्रत्येक गुण का बच्चा ..सभी को एक ही तरीके से हैंडल नहीं किया जा सकता

प्रत्येक आर्गेनाईजेशन में पॉलिटिक्स होती है स्कूल भी अछूता नहीं है परन्तु इससे इतर टीचर्स किस तरह की परिस्थितियां बनाते है यह उन पर निर्भर करता है …क्लास मैनेजमेंट का एक उदाहरण देखिये ….

एक बच्चा क्लास में बहुत ऊर्जावान है परन्तु उसकी ऊर्जा नेगेटिव कार्यों में लगती है या वह खेलकूद ज्यादा करता है तो ऐसे

बच्चो को कैसे हैंडल किया जाये इस प्रश्न का उत्तर बहुत सारे मेरे टीचर मित्र करते हैं …

अधिकाँश टीचर जाने अनजाने में उस बच्चे को हीनभावना का शिकार बना देतें हैं ..उन्हें panishment मिलता है ..kneedown करवाया जाता है …बेंच पर खड़ा कर दिया जाता है या क्लास से बहार निकाल दिया जाता है ये सब करने के बाद टीचर अपने कार्यों की इतिश्री समझ लेते है …जबकि दूसरा पहलु यह है की टीचर सिर्फ पढ़ाने के लिए नहीं बल्कि सीखाने के लिए होता है .और न ही पनिशमेंट देने के लिए रखा जाता है ..यहीं टीचर गलती करता है ….वह उसका समय और भावनाए दोंनों को आहत करता है ….

इसका सलूशन क्या हो सकता है आइये देखे ..वह बच्चा बहुत ज्यादा खेलता है अतः आप उसे क्लास के ही दौरान फूटबाल माँगा के दे दें …और फील्ड में जाने को कहें …एक दो दिन ऐसा ही करें …तीसरे दिन खुद फील्ड में जाएँ और उसे समझाएं की तुम बहुत अच्छा खेलते हो और तुम बहुत अच्छा खिलाडी बन सकते हो ..परन्तु अभी इस समय खेलकर तुम्हारा वक्त और पढ़ाई दोनों ख़राब हो रहा है क्यूंकि देखो क्लास में बाकी सब पढ़ रहे हैं ….जब आप क्लास के बाहर जा कर उसके दोस्त बनने का प्रयास करतें हैं तो उसके मन पर पॉजिटिव प्रभाव पड़ता है …..यहाँ बताता चलू बहुत सारे एप्रोच यहाँ हो सकते है आप कोई नया तरीका ढूंढे …..

 

एक उदहारण और देखिये – यदि बच्चा बहुत ज्यादा ऊर्जावान है तो उसकी ऊर्जा constructive वर्क में लगाइये उसको chanalize कीजिये उसकी ऊर्जा को व्यर्थ न जाने दें बहुत उछल कूद करता है तो उसे gymnast क्लास में भेजिए या डांस क्लास ज्वाइन करने को उत्साहित कीजिये

आपको कई example मिल जायेंगे परन्तु संक्षेप में इसका अर्थ यह है की उसकी ऊर्जा को chanalize कीजिये न की डाँटकर ,पनिशमेंट देकर वह ऊर्जा नेगेटिव ऊर्जा में बदलने का अवसर दे ….

 

अक्सर देखा जाता है की आप बच्चे को मोटीवेट करते हैं बल्कि इसके बजाय आप उसे inspire कीजिये …बार -२ मोटीवेट करके जैसे बेटा यह कार्य करो ..उसको देखो ,उसकी कॉपी करो ,इत्यादि यह ज्ञान देने का तरीका मुझको लगता है की कुछ हद तक सही नहीं है

आइये क्यों न हम बच्चो को inspire करें …example देखिये फिल्मो में सलमान खान कपडे उतार कर बार -२ यह नहीं कहता की gym ज्वाइन करो ..बल्कि आज का युवा या बच्चा उसके कपड़ो को न देखकर उसकी बॉडी और fitness की तरफ आकर्षित होता है और स्वतः वैसा बनने के लिए inspire होकर gym जाने लगता है या वर्कआउट करने लगता है ..यही बात हमे पढ़ाई में भी लाना चाहिए …आप कसी सफल व्यक्ति को स्कूल में बुलाएँ ,बच्चो से उनका डायरेक्ट interaction करवाएं

उनको खुद जानने का मौका दें की वह किस तरह ,क्या -२ करके इस मुकाम पर पहुंचे तब देखिये किस तरह वो inspire होते   हैं ..

“मैथ्स बहुत टफ है तुमसे नहीं बनेगा ” इस तरह के वाक्य उनके unconsius मन पर बहुत प्रभाव डालते हैं इनका प्रयोग न करे …

 

आज कई teachers को देखता हूँ क्लास में चले जा रहे हैं चेहरे पर उदासी लटकी हुई है ..कार्य का बोझ बहुत ज्यादा है

ड्यूटी तो करनी पड़ती है ये मनोभाव है चेहरे पर ..क्लास में जाने का मन नहीं है फिर भी अरेंजमेंट लगा दिया गया है ..स्कूल का माहौल ठीक नहीं है ..बच्चे अच्छे नहीं हैं ..बहुत सारी शिकायतों का पुलिंदा मन में है …ऐसी सोच लिए एक बोझिल आदमी टीचर कैसे हो सकता है ?? वह क्या शिक्षा देगा ??

 

अतः टीचर जोशीला ,ऊर्जावान ,पॉजिटिव सोच वाला ,खुश दिल होना चाहिए तब वह कुछ शिखाने का अधिकारी बनता है अन्यथा अगर आप स्कूल संचालक हैं तो ऐसे टीचर की विदाई कर देनी चाहिए …उस तथाकथित टीचर के लिए बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना अच्छा नहीं है …माफ़ कीजिये इसलिए मैंने उसे तथाकथित टीचर कहा क्यूंकि अच्छे टीचर का सम्मान करना चाहिए ….

क्लास में टीचर यदि ड्यूटी निभाने के बजाय एन्जॉय करे तो वह अच्छी शिक्षा दे सकता है और उससे कुछ सीखा जा सकता है …

 

एक और प्रॉब्लम बढ़ गयी है आजकल ..शिक्षकों में ईगो की समस्या होने लगी है ..”मुझे तो सब पता है “,मुझे ट्रेनिंग करने की क्या जरुरत है ,मैं तो १५-२० वर्षों से पढ़ा रहा हूँ मुझे क्या कोई सिखाएगा ?…ऐसे महोदय से पूछना चाहिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल ? क्या १५ साल पहले भी whatsapp होता था ,facebook वो इस्तेमाल करते थे ? youtube पर कुछ सीख पाते थे?

Tab का नाम सुना था क्या ?क्या यही मेथड तब भी इस्तेमाल होते थे ?तब के टीचर जो डंडो -मुक्कों का इस्तेमाल करते थे क्या आज वही इस्तेमाल कर पाएंगे ??…अतः टीचर में सीखने की ललक होनी चाहिए …आज क्लासरूम बदल चुके हैं ..पढ़ाई के नित नए तरीके आजमाए जा रहे हैं ?वक्त के साथ इनमे भी बदलाव लाना होगा …

टीचर को एक काबिल इंसान होने के साथ -२ व्यवहार पूर्ण कुशल वक्त भी होना चाहिए …शब्दों का चयन ,उनकी डेलिवरी कैसी हो इसका बखूबी ध्यान रखें ..

dialogue delivary बहुत महत्वपूर्ण विषय है आपका बॉडी लैंग्वेज कैसा हो क्लास में ..ये ही बातें आपको प्रिय टीचर बना सकती हैं …कहीं न कहीं एक अच्छा टीचर बच्चो का अच्छा दोस्त भी होता हैं ..आज करिकुलम designed है .पैटर्न निर्धारित है ..क्लास रूम स्मार्ट क्लास जैसे उपकरणों से भरा है अतः आपको इन सबके इस्तेमाल के साथ -२ वैज्ञानिक पढ़ाई करनी होगी ..हर बच्चा अलग और खास होता है अतः क्लास रूम का माहौल भी खास और अलग होना चाहिए …

school management में तीन पार्ट होतें है ..

मैनेजमेंट -टीचर -स्टूडेंट

मैनेजमेंट सभी प्रकार की सुविधाये ,जरूरतें ,शिक्षक इत्यादि उपलब्ध कराता है ..टीचर वह कड़ी है जो end यूजर स्टूडेंट्स को प्रभावित करता है उन्हें शिक्षित करता है …परन्तु एक वह पार्ट है जो इन सबका assesment करता है वह है “अभिभावक “..

“मेरा बच्चा इस स्कूल में आकर पढ़ने लगा है “,यहाँ का माहौल अच्छा है ” फलाना टीचर बहुत अच्छा है ..”…स्कूल मैनेजमेंट बहुत बढ़िया है “…मेरा बच्चा तो यहाँ आकर नाकारा हो गया , “कुछ पढता लिखता नहीं है ” इत्यादि ….

इस feedback को एक प्रॉपर ब्रिज द्वारा मैनेजमेंट तक पहुचना चाहिए ….

 

अक्सर देखा जाता है की प्रिंसिपल ,टीचर ,और मैनेजमेंट में कम्युनिकेशन गैप होता है ? यह स्थिति बहुत हानिकारक होती है …कई बार सही चीजे ,सही खबरें सही टेबल तक नहीं पहुचती …उन्हें छानकर पहुचाया जाता है या उतनी ही बातें पहुचाई जाती है जितना एक चाहता है …

कुछ कड़वी बाते टीचर्स के लिए –

इन पर आप ध्यान दे आखिर आप देश के भविष्य का निर्माण करते हैं —

१) यदि आप ऊर्जावान नहीं हैं

२)यदि आप संतुष्ट नहीं हैं

३)पढ़ाना बोझ लगता है पर ड्यूटी निभाना है

४)tution में तो आप अच्छा पढ़ते हैं पर स्कूल केवल खाना पूर्ति करने जाते हैं

५)अपनी सैलरी से संतुष्ट नहीं हैं

६)स्कूल के एनवायरनमेंट से नाराज रहते हैं

७) प्रिंसिपल और मैनेजमेंट से आपको शिकायतें हैं

८)दूसरे टीचर से जलते हैं

९) आप खुश नहीं रह पाते जिंदगी में कोई ख़ुशी नहीं है

१०)बच्चे आपको पसंद नहीं करते

११)स्टूडेंट के प्रश्न पूछ देने पर आप झल्ला जाते हैं

१२) क्लास में डर का माहौल बना देते हैं

१३)आपकी इच्छा नुसार कोई कार्य नहीं होता

१४)अभिभावक से मिलना आपको अच्छा नहीं लगता

१५) स्कूल की गतिविधियों में आप स्वयं भाग नहीं लेते

यदि आप इन सवालों का जवाब हाँ में देते है तो आपको तत्काल स्वयं शिक्षा का क्षेत्र छोड़ देना चाहिए क्यूंकि आप शिक्षा देने के काबिल नहीं है आप एक शिक्षक नहीं है

अकॅडेमिक्स में एक टीचर को अपनी पद्धतियों का आविष्कार करना चाहिए

inspire करना आना चाहिए

प्रत्येक बच्चे को समझना चाहिए जानना चाहिए

ग्रुप में बाटकर पढ़ाना चाहिए example – अति कुशल बच्चे ,सामान्य बच्चे ,कार्य में पीछे रह जाने वाले बच्चे ..

 

यहाँ एक बात का ध्यान और देना चाहिए की क्लास टेस्ट पहली बार हर प्रकार के बच्चो के लिए सामान होना चाहिए और फिर तीसरे तरह के बच्चो के साथ क्लास में अलग से बात करनी चाहिए ..उनके पीछे रह जाने के कारणों को जानने का प्रयास करना चाहिए

क्लास मैनेजमेंट का तरीका एक यहाँ देखिये – एक क्लास में बच्चो को कुछ टास्क दिया गया है आप सभी बच्चो से बता दें की जिनका टास्क पहले पूरा हो जाये वो अपने टेबल पर हेड नीचे करके आराम से आँखे बंद करके रिलैक्स करे ..यही प्रक्रिया हर बच्चे के साथ तब तक duhraaten रहे जब तक सभी बच्चो का टास्क पूरा न हो जाये ….इससे दो बाते होंगी एक – बच्चे इतने समय में रिलैक्स करके अपनी खोयी ऊर्जा पुनः प्राप्त कर लेंगे

२- teacher को क्लास मैनेज करने में सुविधा होगी और घटती हुई संख्या के साथ कार्य न पूर्ण करने वालो या धीरे कार्य करने वालो पर आप ज्यादा ध्यान दे सकते हैं

हमे यदि स्वस्थ एवं समृद्ध भारत का निर्माण करना है तो शिक्षा व्यवस्था टीचर की गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा …

दोस्तों आज बस इतना ही ..इस ब्लॉग का उद्देश्य टीचर और स्कूल मैनेजमेंट को एक दिशा देना है ..उनको स्वयं अपना इफेक्टिव तरीका ईजाद करना होगा और अभिभावकों को जागरूक करना है की हम स्कूल से ऐसा करने को कहें ….

आपको यह ब्लॉग कैसा लगा इसे बताने के लिए कमेंट बॉक्स में लिखे या मुझे मेल करें

pandey.santosh05@gmail.com

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Santosh Pandey

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