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आपका जहाज जब डूब रहा था

अति महत्वपूर्ण हो जाता है जब उलटी बयार बहने लगे ,उलटी गंगा बहाने की कोशिश होने लगे और आपका जहाज डूबने के लिए तैयार हो जाये, तब टिपण्णी और भी जरुरी हो जाती है .

अच्छा खासा आपका जहाज अपने गंतव्य की ओर चला जा रहा था की तभी आप अपने कप्तान को बदलने की तैयारी में लग जाते है ,  खुदा की बदौलत आपको ऐसा कप्तान मिलता है जिसकी तारीफ में कसीदे पढ़े जाते हैं आपके ही सहयात्रियों से …जिसको आपने पहले कभी अपने ही जहाज से उतार दिया था कालांतर में वह कप्तान बन जाता है आपके ही उसी जहाज का ..

वो नया कप्तान आपके पुराने सफर में रस्ते में ही चढ़ जाता है और अधिपत्य जमा लेता है आपकी ही उपस्थिति में आपके नेपथ्य में ….

पहली ही कोशिश में वो पुराने घिसे पिटे कलपुर्जो को बदल देता है बीच राह में, उन पुर्जों से जो अभी अभी बनाये गए हैं उनपर अभी एक्सपेरिमेंट नहीं हुए . ये भी नहीं पता ये पुर्जे चल भी पाएंगे या सह पाएंगे सागर के थपेड़ों को क्या ….बस बदल दिया कभी आपकी इजाजत से कभी आपको अँधेरे में रख के .

आपको हर बात अच्छी लगने लगी थी बिन सोचे अंजाम का क्यूंकि आप को अब भी लगता था की आप ही उस जहाज पर अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो जहाज की दिशा जब चाहे मोड़ सकते हैं परन्तु कल पुर्जों का खेल आप पर भारी पड़ने वाला था आपकी स्टीयरिंग अब उसके हाथ में थी आपके चाहे अनचाहे.. 

बात सिर्फ कल पुर्जों की ही नहीं वो आपके जहाज का इंटीरियर भी बदल रहा था और उस पर सवार आपके कामकाजी स्तम्भों को भी रिप्लेस किया जा रहा था या करने की कोशिश हो रही थी

आपके जहाज पर कभी कभी जो अचानक लहरों से मछलिया आती थी जिनको बेच के आप कुछ धन कमा लेते थे राह में अपने खर्चो के लिए वहां भी मछलियों का आना बंद करवा दिया या कम करवा दिया ..और तो और खरीदारों से भी कम दाम लेने लगा था परन्तु आपको राह में आने वाली मुश्किलें अब भी नहीं दिख रही थी

कुछ आपके निरंकुश साथी जो आपके थे अब उसकी रहमो करम पर जीने लगे थे चाटुकारिता का नया दौर आया था , खेवइये अब बेसमेंट में आराम फरमा रहे थे …कुछ कामचोरों ने अपना काम इस लिए और लेट करना शुरू कर दिया था की और भी कुछ कामदार आ जाते तो उनका काम कम हो जाता बड़ी ही सूझ बुझ से आपको खुश कर रहे था अपने अफसरों से दगाबाजी करके.

और तो और हद तो तब हो गयी जब कनिष्ठ अपने वरिष्ठों को काम सौपने लगे यह भी आपकी कृपा ही थी उन चंद सिपहसालारों पर जो आपके बड़े ही करीबी होने का दावा करते पर अंदर ही अंदर आपके जहाज को तूफान आने की आशंका मात्र से छोड़ जाने की तैयारी कर के बैठे थे ..बाकायदा अब वो आपका इस्तेमाल कर रहे थे ..अपने लिए आपके ही खर्चों पर उन्होंने जीवन बचाने वाली नौकाएं तैयार कर लिया था जिन्हे आपके ही पीछे छुपा कर रखा गया था ….

कुछ तटस्थ , कुछ कम चाटुकार ,कुछ नव यौवनाएँ जिन्हे आपके जहाज से कोई लेना देना नहीं था उन्हें तो बस अपने सफर के ख़त्म होने का इंतजार था . ऐसी सवारियां आपके कुछ काम नहीं आने वाली थी परन्तु अपना काम वो बखूबी निकाल लेने वाली थी ..उनका जिक्र ही काफी है टिप्पणी नहीं

आप अपने जाने किन ख्यालों में गुम रहने लगे थे की आप को पता ही नहीं चला की कब आपका जहाज रास्ता बदल चूका था वो आज के ज़माने के हिसाब से हाईजैक हो गया था परन्तु जहाज की चंद खिड़किओं पर दूसरे रस्ते के वीडियो चलाये जा रहे थे बड़े होशियारी के साथ .. 

यह आधुनिक संसार है पता ही नहीं चलता आपके पैरों से जमीन कब खिसक गयी खैर  आगे की और भी कहानी है

रस्ते के हर बंदरगाह पर आपके यात्री उतरते जा रहे थे परन्तु चढ़ने वालों की संख्या लगातार कम हो रही थी .इस व्यवस्था से जहाज की आमदनी कम हो रही थी परन्तु इतनी छोटी कमी आपको दिख नहीं रही थी ..आप जिसे नगण्य समझ रहे थे वो आगे आने वाले बंदरगाहों के खर्चे झेलने में मुश्किल लाने वाले थे..

आपके कप्तान जिन्हे कुछ उपकर पसंद नहीं आ रहे थे उन्हें कभी आपके द्वारा या कभी स्वयं भारी मात्रा में माफ़ किया जा रहा था  वो भी जहाज के व्यवस्था पर हलकी चोट करने लगे थे …कुछ आपके रस्ते के खर्च यूँही निपट जाया करते थे अब वो मेन स्ट्रीम से होने लगे थे ……

आपको बिलकुल छान छान के सूचनाएं पहुंचाई जा रही थी क्यूंकि कप्तान का आदेश था “ख़बरदार किसी ने कुछ बोला तो ” 

वास्तव में आपको इस बात का पता ही नहीं था की आपका जहाज किस रस्ते  पर जा रहा था , कौन सा बंदरगाह आगे आने वाला है …

कुछ असहाय इस होने वाली घटनाओं का आभास कर रहे थे पर आप उन्हें अति देय नाकारा समझने की भूल करने लगे थे , आपको चश्मा पहनाया जा चूका था …..

इन्ही सब के बीच जो सवारियां लगातार आपके साथ आपके जहाज पर चल रहीं थी अब धीरे धीरे उनका भी सब्र टूट रहा था क्यूंकि नए ,अनुभवहीन बावर्ची उनको और उनके परिवारों को सड़ा गला भोजन दे रहे थे आगे आने वाले छोटे बंदरगाहों पर वो भी जहाज बदलने का मौका ढूढ लेने में पीछे नहीं रहना चाहते थे ..क्यूंकि मुख्य बंदरगाहों पर निंम्नतम सुविधाएँ हो गयी थी वो भी तीसरे दर्जे की ..

एक बात का जिक्र करना भी जरुरी है रस्ते के बंदरगाहों  में जिन दुकानों से आप राशन और  जहाज निर्माण का  सामान खरीदते थे उनको आप चुकाना भूल जाने लगे ..हाल बदतर होने लगे थे जब आपको जहाज में टूट फुट और सुधार के लिए दुकानदार उधार देना बंद कर दिए अब आपको जरुरत पर तुरंत मूल्य चुकाना पड़ रहा था ..

इस स्थिति में जहाज का संतुलन डगमगा रहा था , जहाज बाहर के साथ साथ अंदर से भी कमजोर हो रहा था ..आगे आने वाले बंदरगाहों पर इसका असर साफ़ दिख रहा था.. जिसको ऊपर ऊपर रंग रोगन करके सीमित जगहों पर आपको घुमाया जाता था जहाँ से मौसम तो सुहावना नजर आये परन्तु जहाज की वो हिस्से नजर नहीं आये …

आने वाली किसी भी सम्भावना से मुकाबला करने के लिए आपके सुरक्षा महकमों के पास साधारण हथियार तक नहीं रह गए थे बंदूके तो दूर एक छोटा सा चाकू भी नहीं था ..चाकू सिर्फ अब जबान पर ही रह गया था ..कभी कभी बावर्चियों के पास दिख जाता था

आपको तो भरोसा भी सिर्फ पेपर पर था ..जो कप्तान की तैयारी थी उसके हिसाब से पेपर आप को दिखा दिया जाने लगा ….आदमी पर कम स्टेटमेंट पर ज्यादा भरोसा …पता नहीं क्यों इस बात से सभी अनजान थे ..

जहाँ तक प्रश्न है स्वाभिमान का इस जैसी कोई चीज आवश्यकताओं पर भारी नहीं पड़ती दिखाई देती है परतुं सवाल है कब तक आवश्यकताओं को हावी रहने देते ..आप का भी तो भरोसा नहीं हो रहा था कब आप रोना रो दें की बस अब आप  लोग सहन नहीं होते …”जहाज पर जो सबसे भारी हैं  वो लोग समुद्र के बीच ही उतर जाइये “क्यूंकि आपको अपना जहाज तो बचाना था… बस एक दिन आपने बोल ही दिया

इसके पहले ही, जाने किस जगह आपको बरमूडा ट्राइंगल मिल जाये यही सोच कर कुछ असहाय  हर पल अपने लिए अलग रस्ते के बारे में सोचने लगे ,अलग जहाज ढूढ़ने लगे …

आपकी सपनो की दुनिया निरंतर आपसे दूर जा रही थी .. और आप स्वछंद विचारों में विचरण करने का आंनद उठा रहे थे और आपका कप्तान ही आपका जहाज डुबो रहा था ….

Santosh Pandey @copyright 2019

ये कहानी का हिस्सा मेरी अगली किताब का हिस्सा है दोस्तों , आपको कैसा लगा कमेंट बॉक्स में लिखिए (कहानी का हिस्सा कहीं भी कॉपी पेस्ट या बदलाव के साथ प्रकाशित न करें ) @copyright 16/05/2019

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