Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

एक गरीब जिसने १०० करोड़ कमाए : REAL STORY

EK GARIB JISNE 100 CRORE KAMAYE : REAL STORY

आज की कहानी है एक ऐसे शख्स की जिसने गरीबी में जन्म लिया परन्तु गरीब नहीं बना  ..जी हाँ मैं आज लाया हूँ रेणुका आराध्य की रियल कहानी    …उनकी जिंदगी की शुरुआत हुई बेंगलुरू के निकट अनेकाल तालुक के गोपासन्द्र  गाँव से| उनके पिता एक छोटे से मंदिर के पुजारी थे,  दान-पुण्य के पैसों से उनका घर नहीं चल पाता था इसलिए वे आस-पास गाँवों में जा-जाकर भिक्षा में अनाज माँग कर लाते| फिर उसी अनाज को बाज़ार में बेचकर जो पैसे मिलते उससे जैसे-तैसे अपने परिवार का पालन-पोषण करते| रेणुका भी भिक्षा माँगने में अपने पिता की मदद करते| पर परिवार की हालात यहाँ तक खराब हो गई कि 6th कक्षा के बाद एक पुजारी होने के नाते प्रतिदिन  पूजा-पाठ करने के बाद भी उन्हें कई घरों में जाकर Servent  का भी काम करना पड़ता|

उनके पिता ने उन्हें CHIKPET के एक आश्रम में डाल दिया, जहाँ उन्हें वेद ,संस्कृत  इत्यादि की पढ़ाई करनी पड़ती थी और वहां दो वक्त ही भोजन मिलता था – एक सुबह 8 बजे और एक रात को 8 बजे| इससे वो भूखे ही रह जाते और पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते| पेट भरने के लिए वो पूजा, शादी में जाना चाहते थे, परन्तु वहां जाने की मनाही होने के कारण नहीं जा पाते थे पढ़ाई के लिए समय नहीं मिलने  और भूखा रहने से ध्यान भी नहीं लगता था | परिणामस्वरूप, वो दसवीं की परीक्षा में fail हो गए।

फिर उनके पिता के देहांत और बड़े भाई के घर छोड़ देने से, अपनी माँ और बहन की जिम्मेदारी उनके कन्धों पर आ गई परन्तु उन्होंने यह दिखा दिया कि मुसीबत की घडी में भी वे अपनी जिम्मेदारियों से मुह नहीं मोड़ते| इस राह पर न जाने उन्हें कैसे-कैसे काम करने पड़े जैसे, प्लास्टिक बनाने के कारखाने में और श्याम सुन्दर ट्रेडिंग कंपनी में एक मजदूर की हैसियत से, सिर्फ 600 रु के लिए एक सिक्योरिटी गार्ड के रूप में, सिर्फ 15 रूपये प्रति पेड़ के लिए नारियल के पेड़ पर चढ़ने वाले एक माली के रूप में|पर उनकी कुछ बेहतर कर गुजरने की ललक ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा और इसलिए उन्होंने कई बार कुछ खुद का करने का भी सोचा| एक बार उन्होंने घर-घर जाकर बैगों और सूटकेसों के कवर सिलने का काम शुरू किया, जिसमें उन्हें 30,000 रुपयों का घाटा हुआ|


उनके जीवन ने तब जाकर एक करवट ली जब उन्होंने सब कुछ छोड़कर एक ड्राइवर बनने का फैसला लिया| पर उनके पास  Driving सीखने के भी पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने कुछ उधार लेकर और अपने शादी को अंगूठी को गिरवी रखकर ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किया|

इसके बाद उन्हें लगा की अब सब ठीक हो जाएगा, पर किस्मत ने उन्हें एक और झटका दिया जब गाड़ी में धक्का लगा देने की वजह से उन्हें अपनी पहली ड्राइवर की नौकरी से कुछ ही घंटों में हाथ धोना पड़ा|

पर एक सज्जन टैक्सी ऑपरेटर ने उन्हें एक मौक़ा दिया और बदले में रेणुका ने बिना पैसे के ही उनके लिए गाड़ी चलाई, ताकि वो खुद को साबित कर सके| वे दिन भर काम करते और रात-रात भर जागकर गाड़ी को चलाने का अभ्यास करते| उन्होंने ठान लिया कि,“चाहे जो हो जाए, मैं इस बार वापस सिक्योरिटी गार्ड का काम नहीं करूँगा और एक अच्छा ड्राइवर बन कर रहूँगा”I



वो अपने यात्रियों का हमेशा ही ध्यान रखते, जिससे उन पर लोगों का विश्वास जमता गया और ड्राइवर के रूप में उनकी माँग बढ़ती ही गई| वे यात्रियों के अलावा हॉस्पिटल से लाशों को उनके घरों तक भी पहुँचाते थे|

पहले तो वे 4 वर्षों तक एक ट्रेवल कंपनी में काम करते रहे उसके बाद वे उस ट्रेवल कंपनी को छोड़कर वे एक दूसरी ट्रेवल कंपनी में गए, जहाँ उन्हें विदेशी यात्रियों को घुमाने का मौक़ा मिला। विदेशी यात्रियों से उन्हें डॉलर में टिप मिलती थी| लगातार 4 वर्षों तक यूँ ही टिप अर्जित करते-करते और अपनी पत्नी के पीएफ की मदद से उन्होंने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर ‘सिटी सफारी’ नाम की एक कंपनी खोली| उनकी जगह कोई और होता तो शायद इतने पर ही संतुष्ट हो जाता, पर उन्हें अपनी सीमाओं को परखने को परखने की ठान रखी थी| इसलिए उन्होनें लोन पर एक ‘इंडिका” कार ली, जिसके सिर्फ डेढ़ वर्ष बाद एक और कार ली|

जब आराध्य ने अपनी पहली कार खरीदी इन कारों की मदद से उन्होंने 2 वर्षों तक ‘स्पॉट सिटी टैक्सी’ में काम किया| पर उन्होंने सोचा “अभी मेरी मंजिल दूर है और मुझे खुद की एक ट्रेवल/ट्रांसपोर्ट कंपनी बनानी है”

Business Ideas with Low or almost without Investment

कहते हैं की किस्मत भी हिम्मतवालों का ही साथ देती है| ऐसा ही कुछ रेणुका साथ हुआ जब उन्हें यह पता चला कि ‘इंडियन सिटी टैक्सी’ नाम की एक कंपनी बिकने वाली है| सन 2006 में उन्होंने उस कंपनी को 6,50,000 रुपयों में खरीद ली, जिसके लिए उन्हें अपने सभी कारों को बेचना पड़ा| उन्हीं के शब्दों में,“मैंने अपने जीवन का सबसे बड़ा जोखिम लिया, पर वही जोखिम आज मुझे कहाँ से कहाँ लेकर आ गया”

 उन्होंने अपनी उस कंपनी का नाम बदलकर ‘प्रवासी कैब्स’ रख दिया| उनके बाद वे सफलता की और आगे बढ़ते गए| सबसे पहले  AMAZON INDIA  ने प्रमोशन के लिए रेणुका की कंपनी को चुना| उसके बाद रेणुका ने अपनी  कंपनी को आगे बढ़ाने में जी-जान लगा दिया| धीरे-धीरे उनके कई और नामी-गिरामी  कम्पनियाँ  इनके CUSTOMER  बन गए, जैसे वालमार्ट, अकामाई, जनरल मोटर्स, आदि|

इसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलट कर नहीं देखा और सफलता की ओर उनके कदम बढ़ते ही गए| उनकी कंपनी इतनी मजबूत हो गई कि जहाँ कई और टैक्सी कंपनियाँ ‘ola’ और ‘uber’ के आने से बंद हो गई, उनकी कंपनी फिर भी सफलता की ओर आगे बढ़ रही है| आज उनकी कंपनी की 1200 से ज्यादा कारें चलती है|

फार्मेसी व्यवसाय कैसे शुरू करें

आज उनकी उम्र 51 वर्ष की हो चुकी है अपने सार्थक प्रयासों ,हिम्मत के बलबूते ,अपने निर्णय लेने की क्षमता के कारण आज इस मुकाम पर पहुंच चेके हैं की उन्हें फिर मुड़ कर पीछे नहीं देखना पड़ेगा ..अपनी लगन की वजह से  इनकी कंपनी के द्वारा आज कई घरों के चूल्हे जलते हैं ,कई गरीबों को काम मिलता है ..तो दोस्तों ,आज इस कहानी का सार यही है की भले गरीब कुल में पैदा हो जाएं पर गरीब न बनकर रहना सीखे ..आपकी काबिलियत आपको ऐसे मुकामों पर ले जाती है जहाँ आप ने कभी सोचा भी न हो ….हर मुश्किल की घडी कुछ न कुछ सीखाती है कुछ न कुछ अवसर देती है……

100 करोड़ कैसे कमाएं

pLEASE sHARE fOR oTHERS…..S

SANTOSH PANDEY

Announcement List

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *