गुम हो गये जुगाडु चदं नेताजी

दोस्तों ,
मेरे किये हुए आह्वाहन पर प्रथम प्रविष्टि प्राप्त हुई है श्री विवेक पाठक जी की …और अपने किये हुए वादे के अनुसार इस पोस्ट को आपके सामने रख रहा हूँ इस पोस्ट का सम्पूर्ण श्रेय श्री विवेक पाठक जी को जाता है …आप सभी दोस्तों से अनुरोध है की जिस तरह आप मुझे आशीर्वाद देते रहे हैं उसी तरह इनको भी सेवा का मौका दें ..तो प्रस्तुत है श्री विवेक पाठक जी का Blog

गुम हो गये जुगाडु चदं नेताजी

मतदान के समय जुगाडु चदं नेता जी अल्हादीन के जिन्न हो जाते है|जहॉ कही विपदा, वहॉ आप बिना दीप रगंडे हाजिर|कहिए हुजुर-” मतदान के अन्तिम वोट तक जुगाडु चदं नेताजी की बैटरी फुल चार्ज है तब तक क्या आदेश है इस जनता के परम भक्त को’ आपकी चौखट की सौगधं,पैरो पर नाक रगड- रगड़ कर मर जायेगे यदि इस भक्त को काम नही मिला तो , मरेगें तो नही और ना ही सन्यास लेगें चाहे उमर जो हो मगर जनता पर अमर बेल की तरह छाये जरूर रहेगे|कुर्सी पर कुण्डली मारनी है तो थोडा बहुत ढोग तो करना पडता है भई|
वोटर तो वो गेहूँ का दाना है जो जुगाडु चदं नेता जी की कुटनीतियो के छटने मे उछाल- उछाल कर ओसाया जाता है बाद मे चपाती बनाकर चट……
मतदान मे जीत पाना कोई आसान काम तो है नही, न जाने कितने अवैध कामो पर चॉबी की चुबन सहनी पडती है तो कही पतिव्रता की तरह संयम मे रहना पडता है| अब मतदान मे जीत मिली है और बोतल न खुले तो धरती पर बोझिल चमचे तड़प- तड़प कर मर जाऐगें,ये क्या कम है जो सुहागिन पत्नी की तरह जुगाडु चदं नेताजी के पवित्र कोमल पद के लिए लम्बी उम्र का ” कैसे भी डलवा चौथ” का व्रत रखा|मतदान के महीकुम्भ मे जुगाडु चदं नेताजी का श्नधालु रूप देखकर किस मछली का मन शरीर तजने को नही भजेगा इसलिए मछलियॉ तो खुशी- खुशी अपने प्राणो की आहुती दे दती है| न जाने फिर किस युग मे ऐसा पुण्य कर्म करने को मिले|
आज तीसरा दिन है जुगाडु चदं नेताजी को मतदान मे जीते हुए और जश्न का भण्डारा ऐसे फीका पड गया जैसे कन्या का मायके से विदाई| कोई पिछलग्गू चमचा भटक गया था दल से’यह सोचकर आया कि अपनी सक्ल दिखाकर मन्नत मॉग लेगें नही तो पछतावे का प्रसाद चढा़कर मथ्था टेक देगें चरणो मे,किन्तु इन पिछलग्गुओ को यह नही पता की रूठे देव को मनाया जा सकता है मगर रूठे दैत्य को नही वो भी ऐसा दैत्य जो मतदान की तपस्या मे सफल होने के बाद पॉच साल अमरता का वरदान लिये बैठा हो| अब तो जनता की भद्र बोली, गोली बनकर आ जाऐ तो वो भी पैन किलर की गोली बनकर सर दबाएगी|
मतदान के बाद जुगाडु चदं नेता जी ऐसे नदारद हो गये जैसे पृथ्वी से डायनासोर, जनता व्याकुल होकर खोजबीन मे लग गयी साथ मे रात्री के लिये जुगनुओ को भी प्रकाश के तौर पे ले लिया| पता नही सियासी जगंल के बेताज बादशाह किस मांद मे अपनी ऐशो आराम की नगरी बनाकर इन्द्रलोक की सुन्दरियो के साथ झुम रहे होें|जुगनुओ की टिमटिमाती रोशनी भी आखिर कब तक साथ निभाती वो भी ओंस की बूँद की तरह धोखा दे गयी|
दिन की रोशनी निकलता देख निराशाओ मे फिर से आशा की जान फुक गयी|तब तक भ्रष्टाचार अमावस का ग्रहण बनकर छा गया,चारो तरफ अधेरा ही अधेरा,ऐसे मै जुगाडु चन्द नेताजी की शक्तियॉ दुगनी हो जाती है|ये प्रकृती के बदलने की कल्पना साकार भी कर सकते है|मदद के लिए जनता किसे पुकारे? आँप्सन के तौर पे दो नाम,हनुमान या शक्तिमान| तभी किसी बुजुर्ग ने तीसरा आँप्सन खोलकर “अन्ना चालीसा” का सुझाव दिया|जनता की आराधनाओ के असर से अन्ना के दूत मन्ना प्रकट होकर नारा सुझाते है| सभी लोकपाल का दिया जलाओ,भ्रष्टाचार का अधेरा मिटाओ|इस नारे ने देश की कमजोर जनता मे पूरी हाइड्रोलिक पॉवर दी जिससे जुगाडु चदं नेताजी का सिहांसन रिएक्टर स्केल मे हिल गया|मदद का चदां मागने के लिए पहुच गये भ्रष्टाचार की आदि देवी के पास|देवी आशन की बुनियाद जरजर तथा कुशाशन को बिमार देख मुस्करा न सकी और खुद खुशी कर ली|
जुगाडु चदं नेताजी को जनता दीया लेकर ढुड रही है परन्तु जुगाडु चदं नेताजी मिस्टर इण्डियॉ हो गये है……………..वर्तमान समय मे जुगाडु चदं अर्थात मिस्टर इण्डियाँ जी की तलाश जारी है इसे आम जन तक पहुँचाकर अपना सहयोग दे|

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आभार श्री विवेक पाठक

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