How to become successful Businessman:कैसे सफल व्यवसायी बनें

दोस्तों ,

सफल होना आपको क्या सिखाता है आज यह जानने का प्रयास करतें हैं ,एक सफल व्यक्ति क्या सोचता है ,क्या समझता है ..क्या करता है ,व्यवसाय में सफल कैसे बने ,वो कौन से कारण हैं जिनसे सफल व्यक्ति सफलतम बनता है आइये इस छोटे से लेख में कुछ बिन्दुओं को छूने का प्रयास करते है …

डॉ. सुभाष चन्द्रा दसवीं पास सफलतम व्यक्ति हैं जिनसे आप को प्रेरणा लेनी चाहिए …डॉ. चन्द्रा दसवी पास और डॉ. कैसे ? यह विचार जरूर कौंधा होगा …परन्तु इस सफलतम व्यक्ति को ईस्ट लंदन यूनिवर्सिटी ने यह उपाधि दी हैं ..इतने बड़े बिज़नेस अंपायर को इतने उचाई पर ले जाने के लिए ….. डॉ. चन्द्रा सिर्फ १७ साल की उम्र से बिज़नेस शुरू करते हैं तो उनका लक्ष्य मात्र इतना होता है की ५ लाख की धनराशि किसी तरह इकट्ठा हो जाए जिससे परिवार के कर्जे को चुका सकें…अपने पिता की बूढी और बीमार दाल मिल जो बंद होने के कगार पर थी जिसे शुरू करने के लिए कैपिटल (धनराशि ) की आवश्यकता थी जो उनके पास नहीं थी….. सरकारी विभाग के पास प्रपोजल देते हैं की यदि उन्हें वो रॉ मटेरियल (दाल ) उपलब्ध कराएं तो उसे वो प्रोसेस करके क्वालिटी दाल बना सकते हैं ….प्रपोजल एक्सेप्ट होने के बाद बिज़नेस की शुरुआत हो गयी…

यहाँ सिर्फ नया आईडिया था कैपिटल नहीं …इस बात के उद्धरण से आशय सिर्फ इतना है की आप में चाह है तो बिना Capital के भी बिज़नेस की शुरुआत हो सकती है ….अगर आपके पास Innovative  आईडिया है तो …..
डॉ. चन्द्रा कहते हैं की वो उस कारोबार को बंद कर देते हैं जो उस बिज़नेस क्षेत्र में ३ या चार नंबर पर आता है अर्थात बकौल डॉ. चन्द्रा सफल बिज़नेस वह होता है जो पहले या दूसरे पायदान पर आता है ..यहाँ मैं यह मानता हूँ की जरुरी नहीं की तीसरे या चौथे या पांचवें पायदान पर आने से बिज़नेस फेल हो जाता है ….बल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है की आप के सफल होने की परिभाषा क्या है ..यह व्यक्ति पर निर्भर करती है की वह कैसी सफलता चाहता है उसके सफलता की परिभाषा क्या है ….

जैसे डॉ. चन्द्रा की अपनी परिभाषा है …जिसकी बदौलत वह सफलतम व्यक्ति है ….सफलता की परिभाषा स्वयं उस व्यक्ति को बनानी पड़ती है अर्थात उसे परिभाषित करनी पड़ती है ….
वो कहते हैं की यदि आप में आग है तो सफलता आपके कदम चूमेगी ..मन में विश्वास होना जरुरी है …बंगाल में जब प्रत्येक व्यवसायी के यहाँ हड़ताल हो रही थी ..हर बाहरी कंपनी यूनियनों की वजह से बंद होने के कगार पर पहुंच गयी थी तब एक कंपनी थी जिसकी किसी भी यूनिट में हड़ताल नहीं हुई …इसकी सिर्फ वजह थी आपसी विश्वास ….कर्मचारियों के मन में कंपनी और मैनेजमेंट के प्रति विश्वास …..
अगर आप फेल हो रहे हैं ….तो कारण जानने का प्रयास कीजिये…इसके लिए जरुरी है आप वर्तमान में जीने की आदत डाले …भूत की चिंता छोड़े …कल आपके साथ क्या हो गया ….इस विचार से छुटकारा पाएं ….

“बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लेहि ”
अर्थात जो बीत गया है उसे भूल जाए ,उसके दुष्प्रभाव से बाहर निकलें …और आगे की सोच बनायें रखें ….ऐसा करने वाले सचमुच सफल होते हैं…..भविष्य आपको भ्रम में डालता है..भूत आपका पीछा नहीं छोड़ता ….जरुरत है वर्तमान में सोचने की …एक बार आप ऐसा करने लगे तो आपके कदम स्वयं सफल होने के लिए चल पड़ेंगे ….
आपको क्या करना है …आप कौन सा Business करेंगे ….मैं कहूँगा जिसमे आपको मजा आता हो ..जिस कार्य को करने में आपका Interest हो वही करें ..

इसके लिए आपको analysis करने की जरुरत पड़ेगी….(इस टॉपिक को किसी अगली पोस्ट में कवर करेंगे )
यदि आपने सोच लिया है क्या करना है आपको …कौन सा बिज़नेस आप करेंगे …फिर उसी सोच के साथ जीना शुरू कर दें …उसी सोच के साथ जागें ..उसी के साथ सोएं ………

आपको मार्ग दिखने लगेगा …

फिल्म ओम शांति ओम का मशहूर डायलाग आपने सुना होगा ..”अगर पूरी शिद्दत के साथ किसी चीज को चाहो तो पूरी कायनात आपको उससे मिलाने की कोशिश करती है ” यह यूँही किसी ने नहीं लिख दिया ..बड़ा पुराना जांचा परखा नुस्खा है ये….

सफलतम बनने के लिए हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं आपको महान पुरुषों की जीवनी पढ़नी चाहिए ..आपको अनेक अनुभवों का साथ मिलता है …प्रेरणा मिलती है उस पथ की ….मेरा यहाँ मानना है की आप उनके पथ पर चलने के बजाय अपने पथ का नव निर्माण करें ….
यही मूलमंत्र है……यहाँ ये भी कहूँगा अपनी विफलताओं से घबराएं नहीं ….हर विफलता आपको सफल होने का एक नया तरीका सीखा जाती है ….पूर्ण विश्वास करें ..सम्पूर्ण ऊर्जा के साथ जुट जाएँ ..अपने कर्मपथ पर ….सफलता से सफलतम की ओर……….
थॉमस अल्वा एडिसन ने बल्ब का आविष्कार करने के बाद कहा की वह १३०० बार विफल हुए और अब उनको १३०० तरीके आते हैं जिनसे बल्ब नहीं बन सकता …इसी जज्बे की जरुरत है ……चलते -२ आपको बताता चलूँ की डॉ. चन्द्रा कौन हैं ….ये वही सफलतम व्यक्ति है जिन्हे फादर ऑफ़ इंडियन टेलीविजन कहा जाता है ….ज़ी टीवी के चेयरमैन ..हिंदुस्तान में पहला प्राइवेट चैनल लाने वाले ….कई देशो में कंपनियों के मालिक …
(गूगल गुरु से गूगल करें )…….
आज के लिए इतना बहुत है……फिर मिलते हैं नए इनोवेटिव तरीकों से पुराने राज जानने के लिए …पढ़ते रहें ..बढ़ते रहे ……….पढ़ो इंडिया …एन्जॉय योर सक्सेस …………………..

santosh

Santosh Pandey

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