अपने काम का महत्व

दोस्तों , यदि आप व्यापारी हैं या Business करना चाहते हैं या आपका Business चल नहीं रहा है तो यह Article अवश्य पढ़ें ..

व्यापारी  (Business man) लोग जानते होंगे की  लागत, मुनाफा ,घाटा ये तीन शब्द उनके बिज़नेस के लिए कितने महत्वपूर्ण शब्द हैं इनके बिना Business संभव ही नहीं है इनका आना जाना लगा रहता है …

इसे जानने और समझने के लिए एक Story पहले पढ़ते हैं

एक कुम्हार के परिवार में Eight लोग थे। घर सँभालने के लिए बड़ा लड़का मिट्टी के बर्तन बनाने में अपने Father की मदद करता था। अचानक एक दिन उसके Father की मौत हो गई। अब Family की सारी ज़िम्मेदारी उस लड़के पर ही आ गई। हालाँकि वह मिट्टी के बर्तन बनाने में Father की Help बहुत समय पहले से ही करता आ रहा था, लेकिन फिर भी वह इस कला में पारंगत नहीं हो पाया था।

पिता की न रहने पर उसे घड़े बनाने का काम अकेले ही करना पड़ रहा था। अपने काम को लेकर उसके मन संशय रहने लगा कि उसके बनाए घड़े ठीक बने भी हैं या नहीं ? इन घड़ों का कोई खरीददार(buyer) मिलेगा या नहीं ?

एक दिन अपने बनाए घड़ों के लेकर वह लड़का Shop पर इसी उहा-पोह के बीच evening तक बैठा रहा। उस दिन शाम तक उसका एक भी घड़ा नहीं बिका।




उसके Father का Friend जो कि पास में ही Fruits का ठेला लगाता था, लड़के की मनोदशा समझ रहा था। वह पास आकर उससे कुछ इधर-उधर की Conversation  करने लगा। तभी कुछ Childrens, जो की पास में ही Cricket खेल रहे थे, की Ball से उस फलवाले का मटका ठेले से नीचे गिर गया और गिरते ही टूट गया। उस फलवाले ने अपने दोस्त के लड़के से ही घड़ा खरीदकर उसकी कुछ Help करनी की सोची। फलवाले ने उस बच्चे से घड़े का  Price पूछा। बच्चे ने घड़े का मूल्य 50 रूपये बताया। ये मूल्य सुनकर फलवाले ने उससे  BARGAIN करने का इरादा बनाया।

फलवाले ने मोलभाव करते हुए उससे Price कुछ Less करने को कहा। कुछ सोचने के बाद लड़का 30 रूपये में घड़ा देने को राज़ी हो गया। फलवाले ने फिर मोलभाव करते हुए कहा इस घड़े के इतने दाम तो ज्यादा है, तुम्हे इसके दाम कुछ और कम करने चाहिए। इस पर लड़के ने कुछ देर सोचने के बाद पहले 20 फिर 10 में हाँ कर दी। लड़का सोच रहा था कम से कम एक मटका तो आज Sale हो जाए।

पर फलवाले ने उस घड़े के पूरे 50 रूपये देते हुए उस लड़के से कहा, “मैं तुम्हारे पिता का मित्र हूँ, इसलिए समझा रहा हूँ कि कभी भी अपने काम को कम मत आंकों।

व्यापार में लागत और श्रम के साथ मुनाफा भी जरूरी है। अगर ख़ुद के काम को कम आंकोगे तो लोग भी तुम्हारे काम को महत्त्व नहीं देंगे।”

इस Story को सुनाने का मतलब अब आप समझ गए होंगे की मैं आपको समझाना क्या चाहता हूँ .

दोस्तों , अपने किये गए कार्यों का मूल्य समझिये यही सार है आपका बिज़नेस इस पर निर्भर करता है की आप अपने कार्य को कितना महत्व देतें हैं कितना मूल्य देते हैं
यह मूल्य आपके लागत और मुनाफे पर निर्भर होता है ….जैसा आप जानते हैं रूपये का अवमूल्यन लगातार होता जा रहा है …आज दस बीस हजार या लाख का महत्व भी उतना नहीं रह गया है जितना हमारे दादा जी के समय था .

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Santosh Pandey

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