प्रिय पाठक गण ,

कविता कहाँ से जन्म लेती है यह नहीं पता मुझको
जो कलम ने लिखाया वही लिखा हमने ……………………..

आज आपके समक्ष एक कविता रख रहा हूँ जिसका शीर्षक है “जिंदगी कट गयी थी ” …..आप अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर रखियेगा ..मुझे इन्तजार रहेगा हमेशा की तरह …………………….

जिंदगी  कट  गयी  थी

अफवाहों  की  परवाह  न  करते  हुए  वो  बेबस  बैचैन  सी

किताबों  के   अंदर  पन्ने   पलटते  हुए

 कुछ  जिंदगी  से  ठगा  सा  महसूस  करते  हुए

पलकों  में  आंसुओ  का  समुन्दर   लिए

झाड़  फानुसो  में  कैद  ,बिजली  चमकने  के  बाद  का  शोर  लिए

मन  की  तहों  में  ह्रदय  की  गहराइयों  में

निरंतर  अकेली  अकुलाहट  से  भरी  साँसों  में

 अपनों  के  सूखे  तनो  के   बीच  ,

रिश्तो  के  धागो  के  बीच

साँसों  का  इन्तजार  करते  हुए  ,

धीरे  से  दरवाजे  को  धकेला ……….

एक  आवाज  आई  “जरा  सुनती हो ”……..

हाँ   …निकला  ही  था  की  खामोश  जबान  से  .

.की  अचानक  फिर  वही  गरम  हाथो  ने  अपनी  आगोश    में  ले  लिया ….

विचार  शून्य  मस्तिष्क  में

कितने  ही   अनसुने  ख्वाब  आये  और  चले  गए …

कड़कड़ाती  ठण्ड  में  जैसे  किसी  ने  अंगीठी  जला  दिया  था  उस  पल ……

अफ़सोस   लेकिन   वही  …मजबूरी  वही  …..गूंगी   न  होते  हुए  भी  ….

वो  चुप  रहने  का  एहसास  कराती  हुई …..”पानी   लाती  हूँ ”….

आवाज  अनसुनी  थी  …दरवाजे   की  घंटी  बजी  थी ..

चौखट  पे  कोई  आया  था ……..फिर  वही  सुना -पन  फिर  वही  बेचारगी ..

घिरती  हुई  रात  ….तन्हाईयो  की  किलकारियाँ ……..बैठको  का  दौर ….

वही  इन्तजार   …….अगली  सुबह  तक …..वही  सपने  जागती   हुई  आँखों  में …फिर  वही  पलकों  में  समुन्दर …

झाड़  फानुसो  में  कैद  ,बिजली  चमकने  के  बाद  का   शोर  लिए

मन  की  तहों  में,   ह्रदय  की  गहराइयों  में

निरंतर  अकेली  अकुलाहट  से  भरी  साँसों  में

 अपनों   को   सूखे  तनो  के   बीच  ,

साँसों  का   इन्तजार  करते  हुए  ………………….

जिंदगी  कट  गयी  थी ……………………………………………………………..1) to be Continued………

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Santosh Pandey

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