कौन है हिन्दू कौन ईसाई, कौन है सिख कौन मुसलमान ?

KAUN HAI HINDU KAUN ISAI KAUN HAI SIKH KAUN MUSALMAAN

दोस्तों, आज जब मेरी बेटी ने वाकया बताया तो बड़ी ग्लानि उत्पन्न हुई क्यों हम भारतीय बचपन में ही अपने बच्चो को धर्म जातीयता का इतना बोध करा दे रहें हैं की वह दूसरे धर्म और जातियों  के प्रति मन में दुर्भावना पाल बैठे हैं हुआ यूँ की पांचवीं कक्षा  में पढ़ने वाली बच्ची  आज जब स्कूल से वो वापस घर आयी तो उसने अपने कक्षा में एक पढ़ने वाली बच्चे के बारे में बताया की आज उसने जैसे  ही अपनी एक पाठ्य पुस्तक में एक पेज पर ॐ छपा हुआ देखा  तो जल्दी जल्दी पेन से उसको काटने लगी और कहा की छी-छी ये क्या छाप देते हैं ? और वह तब तक नहीं रुकी जब तक ॐ मिट नहीं गया यहाँ तक की पेज भी  फट गया

मैंने अपनी बेटी से पूछा ऐसा उसने क्यों किया ? जबाब बड़ा ही मार्मिक था – वो क्रिश्चियन थी न इसलिए …..

यह छोटी सी दिखने वाली घटना बिलकुल भी छोटी नहीं है जब ९ या दस साल  का बच्चा ऐसा करता है तो उसके पीछे कितना प्रयास किया गया होगा परिवार द्वारा , माँ  बाप द्वारा , समाज द्वारा , गुरुओं द्वारा , धर्म गुरुओं द्वारा ..यह ऐसे ही नहीं घटा ….उस मासूम के दिमाग  पर कितना गहरा असर छोड़ा  गया होगा

क्या प्रयास और कितना प्रयास की एक अनजान मासूम बुद्धि अभी से दूसरे धर्म के प्रति ऐसा व्यवहार ?

यह आप बिलकुल मामूली मत समझिये इसके पीछे कई ताकतें लगी हुई हैं राक्षसी ताकतें ….

हमारे देश में इतना आसान नहीं है ह्यूमन बिहैवियर को समझना ..जब पूरा समाज इन्ही जाती धर्मो में उलझा हुआ है जब देश की ताकतें इन्ही के बल पर राज करना चाहती हैं …अभी पिछले दिनों दिल्ली के एक स्कूल में कक्षायें हिन्दू और मुस्लिम के आधार पर बाटी गयी थी …हालांकि स्कूल प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया पर कही न कही इन सब के पीछे शातिर दिमाग काम कर रहा है …

मेरा उद्देश्य इस पोस्ट को लम्बा करना नहीं है किन्तु आगाह जरूर करना चाहता हूँ की एक बार आप सोचिये  तो सही  आखिर  आप करना क्या चाहते हैं ..” हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई भाई ” यह सिर्फ अब नारा बन कर रह गया है अब इसमें सच्चाई नजर नहीं आती या यूँ कहूं अब कम नजर आती है ….यहाँ आगाह कर रहा हूँ साथ में चेतावनी भी दे रहा हूँ मत बिगाड़िए बचपन को ..बचपन के खेल को ….

आज जगह  जगह धर्म परिवर्तन का खेल चोरी छुपे हो रहा है कैसे हिन्दू मुस्लिम  लालच देके  ईसाई बनाये जा रहे है आपके और हमारे आस पास ही हो रहा है  …जरुरत है आखें खोल कर देखने की ..भविष्य बिगाड़ रहे हैं आप अपने बच्चो का …… “भारत तेरे टुकड़े होंगे ” में शामिल होने वालों से पूछना चाहता हूँ की तुम्हारे बच्चे कहा रहेंगे ????  उनके  लिए देश बनाओगे …कितने ? ?

“एकता में ही शक्ति है ” ऐसा अपने बचपन में पढ़ने वालों ,ऐसे ही रहने वालों अपने बच्चों को कैसी  शिक्षा दे रहे हो ?

अंत में बस यही कहना है अब भी वक़्त है संभल  जाओ ……………….

SANTOSH PANDEY

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