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क्या किसी ने सोचा मेरे बारे में

दोस्तों , आज लाया हूँ अपने दोस्त “शार्दूल सिंह -इलाहाबाद” की कविता जो कुछ अनछुए पहलुओ का उजागर करती है , आप भी पढ़िए .आइये हम उस किरदार को समझने का प्रयास करते है जिसका बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया गया है..शीर्षक है “क्या किसी ने सोचा मेरे बारे में”
यह कविता उस समाज पर ,उसकी तकियानूसी ख्यालात पर कुठाराघात करती है जहाँ आज भी नारी का शोषण बदस्तूर जारी है …….

 

क्या किसी ने सोचा मेरे बारे में

 

मैं एक शब्द हूँ या शब्दों की गुत्थी हूँ
क्या किसी ने सोचा मेरे बारे में II
कभी सच तो कभी झूठ हूँ मैं
कभी प्यार तो कभी तकरार हूँ मैं
कभी जिंदगी की भागदौड़
तो कभी विश्राम हूँ मैं
कभी सवाल तो कभी जवाब हूँ मैं II
जमाने ने लूटा है मुझको
ख्वाब में भी आलम है बर्बादी का
ये फरेब की दुनियाँ
ये मतलबी लोग
क्या किसी ने सोचा मेरे बारे में II
तुम पढोगे मुझे
मेरा मखौल उड़ाओगे
और फिर उसी दुनियाँ में छोड़ आओगे
जहाँ सिर्फ अँधेरा ही अँधेरा है II
फिर से मेरी इज्जत सरेराह नीलाम होगी
फिर मैं नुमाइश की चीज बना दी जाउंगी
सब हसेंगे मुझ पर
मैं अपनी बेबसी पर मुस्कुराऊंगी
कभी लब पर कभी पैमाने पर नजर आउंगी
यही है मेरी कहानी
किसी लुटेरे हमसफ़र की जुबानी
मैं खुश हूँ आज
किसी ने सोचा तो मेरे बारे में II

Presentation1

Santosh pandey

 

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One thought on “क्या किसी ने सोचा मेरे बारे में

  • March , 2017 at 11:01 am
    Permalink

    kya khoob kya hai

    Reply

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