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Mahaparva of Democracy – Voter Vote Leader and Truth – Lok Sabha Elections 2019

Mahaparva of Democracy – Voter Vote Leader and Truth – Lok Sabha Elections 2019

दोस्तों , 

भारतीय लोकतंत्र का महापर्व आ रहा है आप भी तैयार रहिये जब भी आपके यहाँ वोट हो ..वोट देने अवश्य जाइये भारतीय सरकार प्रत्येक वोट के पीछे ४६ रूपये  खर्च करती है जो हमारे ही दिए हुए टैक्स से खर्च होता है ..लोकतंत्र के नीव में ही वोट होता है जो हम और आप जाकर evm में कास्ट करते हैं …..लेकिन सच्चाई आज कुछ और ही है वोटों के पाने और ताजपोशी एक ऐसी कहानी बन गयी है जो आज मैं इस पोस्ट के माध्यम से आपको बताऊंगा ..आप भी जानते हैं परन्तु उजागर मैं करूँगा …आज वोटर की कैटेगरी बदल गयी है .. जहाँ इस बार के चुनाव में 2 करोड़ नए मतदाता शामिल होंगे वहीँ  पुराने मतदाता फिर अपना वोट डालेंगे …..हमारे नेताओं ने   इस लोकतंत्र की धज्जियाँ अंदरूनी रूप से उड़ा रखी हैं 

जहाँ आज वोट और वोटर सरेआम पैसों से खरीदें जाते हैं तो वहीँ बलशाली बाहुबली प्रभाव भी होता है चुनावों पर …पैसा पानी की तरह मलिन बस्तियों में बहता है परिवार के सदस्यों की बोलियां लगती हैं ..चुनाव के पहले की रातें गलियों में गुंजायमान होती हैं जहाँ गरीब परिवार देर रात तक जाग जाग के उम्मीद लगाता है आज कितना मिलेगा और कौन कौन देने आएगा …बड़ा ही गजब का मंजर है ये जब वोटर हर प्रत्याशी से paise रूपये लेता है .. मगर वोट अपनी मर्जी का ही देता है …जिसका   हरजाना जीतने के बाद वह प्रत्याशी इनके भविष्य से लेता है और इनका भविष्य हर्जाना भरता है …..और गरीब फिर गरीब हो जाता है  और अगले चुनाव का इन्तजार करता है .. लेकिन जीतने वाला कई गुना अमीर   हो जाता है ….

चुनाव के पहले जब मुर्गे और शराब का दौर होता है तो यही गरीब जैम के मजे लेता है .. असल में चुनाव गरीबों और मलिन बस्तियों में एक  पर्व की तरह होता है

जहाँ प्रत्येक प्रत्याशी के गुर्गे रात में मुर्गे का पर्व मनाते है और दिन में वही प्रत्याशी हाथ जोड़े रहम की भीख की तरह वोट मांगता है … गजब का दोहरा चरित्र लिए अपने  नेता जी आते हैं …आप अपने आस पास एक बार नजर डालिये बड़ा मजा आएगा परन्तु लोकतंत्र इन बहुत से रंगों में डूबे  हुए भी जीत जाता है

एक और नजारा दिखाता हूँ  ..वह यह है की मलिन बस्ती हो या अटल आवास …मजदूर गरीब को राष्ट्रवाद , विकास ,लोकतंत्र इन सब से कोई लेना देना नहीं है  वह बस यह देखता है की कौन उसे कितना देगा ,कब देगा ,कूपन कितने का होगा , murga किस दुकान से पर्ची  देने से मिलेगा , चुनाव बाद का कूपन कितने का है जो चुनाव जितने के बाद नेता जी अपना वादा पूरा करेंगे ….मेरे घर में कितना वोट है उसका कितना मिल सकता है ….घरेलु महिलाएं समिति बना कर बड़े ही गर्व से नेता जी से मांग लेती हैं …..और नेता जी न नहीं कर पाएंगे ……

असल में लोकतंत्र  का बिगड़ा यह स्वरुप इन सभी पात्रों में सौदा करा रहा होता है जिसमे कभी कभी दोनों successful  होते हैं .

वहीँ गरीब आदमी को यह पता  नहीं होता की सड़क किसने बनवाया है उसके गावं में ,यह योजना किसने लागू की ..इसी बात का फायदा ये नेता उठा लेते हैं जैसा बताया जाता है उसी ब्रैनवॉश के कारण वह पैसों से बिक जाता है …..उसे विकास , जीडीपी , इन्वेस्टमेंट से मतलब नहीं होता वह देखता है पैसा कितना    मिलेगा ..इसी बात का फायदा 72000 देने वाले उठाते हैं ..उस गरीब का वोट बिक जाता है इन वादों के कारण …”भैया आइहें त दीहें हमार भोट त पंजे के जाहि ”  ..पूछने पर आपके इलाके में कौन खड़ा है उसे नहीं मालूम …

उसे भविष्य से मतलब नहीं क्यूंकि  वर्तमान उसका इन नेताओं ने गन्दा बना दिया है और वह उसी को सुधारने हेतु पैसों के पीछे  भागता  है ..

पिछले कुछ चुनावों  में नए तरीके  ईजाद हुए हैं जहाँ नए 10 के नोटों के सीरियल को कूपन के तौर पर इस्तेमाल kiya  जाता है ..इन कूपन को आप पैसों की गॉरन्टी भी  मान   सकते हैं ..चुनाव से पहले आप को कूपन दिया जाता है जो आप उस प्रत्याशी की तरफ से चुनाव से पहले तय dukano  पर जाकर उसके कूपन मूल्य के बराबर सामान, मुर्गे ,शराब इत्यादि खरीद सकते हैं और चुनाव के जीतने के बाद उस प्रत्याशी द्वारा दिए गए कूपन के मूल्य के बराबर पैसे रूपये प्राप्त कर सकते हैं ..बड़ा ही संगठित तंत्र चलता  है जहाँ बेईमानी की जगह नहीं है …यह अलग बात है की इस पर भी वोट निश्चित   नहीं है  यह जुआ है जो प्रत्याशी  द्वारा खेला जाता है और जीतने के बाद वह हमसे वसूल  लेता है कई गुना ..

हर प्रत्याशी इस गणित को जानता है इसलिए वंशवाद चलता है क्यूंकि वह हारता नहीं है ….

फिर भी इस बिगड़े स्वरुप को कोई सुधारने की कोशिश तो दूर की बात सोचता या कहता भी नहीं है क्यूंकि वो ही भाग्यविधाता हैं इस देश का जिन्हे इसका फायदा मिलता  है …..

परन्तु  हमे इस लोकतंत्र को ही मानते हुए वोट करने जाना ही चाहिए क्यूंकि पढ़े लिखे लोग ही ऊपर बताये गए तरीकों का तोड़ निकल सकते हैं ..घर से बाहर जरूर निकलिए …क्यूंकि आप ही देश का भविष्य बदल सकतें हैं ..नीचे का तबका जब तक यह बात समझेगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी …देश बचाइए इन नेताओं से ..अपना शक्ति प्रदर्शन कीजिये जिससे इन्हे भी समझ में आये पैसा ही सब कुछ नहीं होता है ..एक एक वोट की ताकत क्या होती है …और हो सके तो अपने आस पास नीचे के तबके के लोगों को जागरूक बनाइये ..जिससे ये भी जान सके राष्ट्रवाद क्या होता है ……GDP क्या होती है …

इलेक्शन क्या होता है और क्यों जरुरी है …कीप वोटिंग

Santosh pandey

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