मैं लिखना चाहता हूँ

Main likhna chahta hoon

प्रिय पाठक , आज मैं लाया हूँ आपके लिए १६ जून २००३ की लिखी मेरी कविता ” मैं लिखना चाहता हूँ “….अपना आशीर्वाद इस कविता को भी दीजिये…………

मैं लिखना चाहता हूँ

मैं लिखना चाहता हूँ
मस्तिष्क में कुछ तूफ़ान उठा है
मन सागर में लहरें जागीं है
दिल में कुछ बेचैनी है
आँखों में कुछ तस्वीरें हैं
मैं उन तस्वीरों को लिखना चाहता हूँ
कहीं से कुछ सदायें आई हैं
कहीं बादल भी बरसे हैं
कहीं पे आग लगी है
कहीं पे कुछ तो घटा है
जो मैं लिखना चाहता हूँ
समय ने कुछ खोया है
आसमाँ ने कुछ पाया है
विचारों ने पाला बदला है
मैं क्यों लिखना चाहता हूँ
हवाओं में कुछ गर्मी है
माथे पर पसीना है
अधरों पर ख़ामोशी है
मैं क्या लिखना चाहता हूँ
कुछ कही अनकही
कुछ अपना बेगाना सा
मैं कुछ तो लिखना चाहता हूँ

pen

Santosh Pandey

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