नयी शिक्षा नीति २०२० : क्या बदलेगा टीचर्स और प्राइमरी स्टूडेंट्स के लिए

नयी शिक्षा नीति २०२० : क्या बदलेगा टीचर्स और प्राइमरी स्टूडेंट्स के लिए

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दोस्तों , नयी शिक्षा नीति २०२० क्या बदलाव लाएगी अध्यापकों और प्राइमरी के बच्चो पर ? इसी बदलाव को दर्शाती ये पोस्ट आपके सामने पेश है आइये देखें

यह मोदी सरकार के एक के बाद एक बड़े फैसले लेने तथा कोरोना की विभीषका के बीच आयी  21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है और यह 34 साल पुराने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 की जगह लेगी .

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े होने के नातें मैं मानता हूँ की इस नीति को धरातल पर लाने में अभी बड़ी मशकत झेलनी होगी आधारभूत संशाधनो की कमी और प्रशिक्षण प्राप्त अध्यापकों की कमी अभी इतनी जल्दी ये बदलाव नहीं आने देगी परन्तु फिर भी शुरुआत हो चुकी है मानव संशाधन मंत्रालय का नाम भी बदला गया है और अब इसे शिक्षा मंत्रालय के रूप में जाना जायेगा  नाम बदलने मात्र से यह काम आसान तो नहीं किन्तु मोदी सरकार के इरादे यूँही छोड़ देने के तो नहीं लगते .अगले एक दो माह तक तो स्कूल खुलने के आसार तो दिखाई नहीं देते किन्तु बड़े बदलाव के लिए सही समय है प्राइमरी स्तर पर कार्य किये जा सकते हैं .

 

नई शिक्षा नीति में 10+2 के फार्मेट को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। अभी तक हमारे देश में स्कूली पाठ्यक्रम 10+2 के हिसाब से चलता है लेकिन अब ये 5+ 3+ 3+ 4 के हिसाब से होगा। इसका मतलब है कि प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवीं तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12 तक आखिरी हिस्सा होगा .

पहले स्टेज में  तीन साल बच्चे  प्री-स्कूलिंग शिक्षा लेंगे। फिर अगले दो साल कक्षा एक एवं दो में बच्चे स्कूल में पढ़ेंगे। इन पांच सालों की पढ़ाई के लिए एक नया पाठ्यक्रम तैयार होगा। मोटे तौर पर एक्टिविटी आधारित शिक्षण पर ध्यान रहेगा। इसमें तीन से आठ साल तक की आयु के बच्चे रखे जायेंगे । इस प्रकार पढ़ाई के पहले पांच साल का चरण पूरा होगा।

दूसरा स्टेज में कक्षा तीन से पांच तक की पढ़ाई होगी। इस दौरान प्रयोगों के जरिए बच्चों को विज्ञान, गणित, कला आदि की पढ़ाई कराई जाएगी। आठ से 11 साल तक की उम्र के बच्चों को इसमें कवर किया जाएगा।नई नीति के तहत कक्षा तीन, पांच एवं आठवीं में भी परीक्षाएं होगीं। जबकि 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं बदले स्वरूप में जारी रहेंगी।बच्चों की रिपोर्ट कार्ड में बदलाव होगा। उनका तीन स्तर पर आकलन किया जाएग। एक स्वयं छात्र करेगा, दूसरा सहपाठी और तीसरा उसका शिक्षक। नेशनल एसेसमेंट सेंटर-परख बनाया जाएगा जो बच्चों के सीखने की क्षमता का समय-समय पर परीक्षण करेगा।

प्री स्कूल जो अभी बच्चो के मनोरंजन केंद्र के नाम से रजिस्टर होते थे अब स्कूल की परिभाषा में आ जायेंगे सरकार का कहना है की बुनियादी ढांचों के विकास के साथ साथ नए केंद्र खोले जायेंगे .सभी को जोड़ने का प्रयास होगा परामर्शदाता ,प्रशिक्षक भी इस क्रम में  जोड़े जायेंगे जिससे स्किल डेवलपमेंट और संख्यात्मक ज्ञान की दिशा में हमारे  कदम बढ़ेंगे . शुरू से ही रोजगार परक कार्यक्रमों से भी जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है . पुरानी व्यवस्था जिसे पुरानी सरकारें ढो रही थी जिनमे हम सिर्फ  कार्यालय बाबू  जैसे पदों को शुशोभित करने के लिए पीढ़ियां पैदा कर रहे थे उनसे छुटकारा मिलेगा .

बच्चो को अब केवल पुराने ढर्रों से निकल कर नयी व्यवस्था की तरफ बढ़ना है जिसमे वो काबिल इंसान बन सकें . इन सुधारों में नंबर गेम से भी छुटकारा मिलने जा रहा है जिसके कारण आये दिन बच्चों के डिप्रेशन में जाने ,आत्महत्या करने की प्रवित्ति बढ़ने के उदाहरण सामने आ रहे थे बच्चो के साथ साथ अभिभावकों पर भी एक प्रकार का दवाब बना रह रहा था . प्रबंधन में रहने के कारण जब भी अभिभावकों से मैं बात करता था तो लगभग हर अभिभावक शिक्षा की पुरानी लार्ड मैकाले व्यवस्था से परेशान होता था . बच्चा सिर्फ सर्टिफिकेट लेने और अभिभावक सिर्फ महंगी फीस देने तक ही सीमित रह गया था . सरकारों  में अध्यापकों को पढ़ाने के आलावा सभी सरकारी कार्यों में साल भर व्यस्त रखने का एक तंत्र विकसित हो गया था सो अध्यापक वही करे जो सरकार कराये की नीति पर आके पढ़ना पढ़ाना भूल ही गया था . इस नीति में अन्य कामों में निर्भरता कम किये जाने के आसार हैं जो अध्यापकों को उनका मूल कार्य करने की दिशा में अनुकूलन बढ़ाएंगे . निजी स्कूलों में कम वेतन देकर ऐसे बिना प्रशिक्षण अध्यापक रखे गए हैं जिन्हे पता ही नहीं है पढ़ाना क्या होता है ? कम पैसे में इतना ही मिलेगा वाला ऐटिटूड अध्यापको में देखा जा रहा है बिना झिझक मैं ये कहने को बाध्य हूँ की 80 प्रतिशत अध्यापक ऐसे ही गैर प्रशिक्षित हैं जो पढ़ाना नहीं जानते चाहे वो सरकारी या निजी स्कूल हों

नयी नीति अब बहुत कुछ बदल देने की क्षमता रखती है इस 21 वीं सदी की नयी नीति बच्चो में व्याहारिक और कौशल बढ़ाने वाली नीति साबित होगी जिससे समग्र ज्ञान , चिंतन की कला , अनुभव इत्यादि विकसित होंगे जो आगे के जीवन को गति देने में पर्याप्त कुशल होंगे . बच्चो और अध्यापकों अभिभावकों सबके पास विकल्प होंगे चुनने का जो एक बहुत बड़ी बात है महान बनने के लिए . नयी नीति में जो सबसे अच्छी बात मुझे लगी है और आप सब भी सहमत होंगे की शिक्षा का माध्यम प्राइमरी स्तर तक कम से कम अपनी मातृ भाषा या क्षेत्रीय भाषा में होगी यह बड़ा परिवर्तन है किसी पर थोपा नहीं जायेगा कोई खास भाषा . विकल्प होंगे अपनी भाषा चुनने का .संस्कृत और संस्कृति दोनों का ध्यान रखा है इस नीति में

ऐसी पृष्ठभूमि तैयार की जाएगी की आपके बच्चों को सीखने का अवसर मिल सके परीक्षाएं रटने की प्रवित्ति को ख़त्म करने वाली होंगी जिससे मानसिक  विचारों को बड़ा करने में सहायता मिलेगी .  शिक्षा पहले की तरह लाभ के लिए नहीं व्यावहारिक होगी  ये बदलाव यूँ ही नहीं आया है ढाई लाख ग्राम पंचायतों , 6600 ब्लॉकों ,6000 यूएलबी .676 जिलों से प्राप्त लगभग 2 लाख सुझावों का अध्ययन करके इस नीति को विकसित करने का काम किया गया हैं

अध्यापकों की भर्ती ,पदोन्नति योग्यता आधारित होगी जिसकी वजह से क्रन्तिकारी बदलाव देखने को मिलेंगे क्यूंकि अध्यापक भी इस रेस में बने रहने के लिए खुद को अपग्रेड करते रहेंगे . और भी बहुत सारी परिकल्पनाएं हैं जो बेहतर  तथा उम्मीदों से भरी हैं किन्तु मेरे विचार से प्री स्कूल से प्राइमरी स्तर तक का बदलाव नीव है अगले आने वाली कुछ पीढ़ियों का . सदा परिवर्तन होता रहेगा और परिवर्तन की  उम्मीद भी जारी रहेगी .आइये नयी शिक्षा नीति का स्वागत करें 2020 है ये इतिहास में दर्ज होने वाला साल . ऑनलाइन शिक्षा  , प्रद्योगिकी का इस्तेमाल ,डिजिटल प्लेटफॉर्म , लोकल स्थानीय  भाषा ,प्रगति , कैरियर में सुधार, जीवन स्तर में सुधार , अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचने के आसार सभी कुछ मुझे दिखाई दे रहे हैं इस मार्ग में आइये प्रशस्त करें .

 

 

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