सफलता की कुंजी यानि S.M.A.R.T .H.E.A.L.

सफलता की कुंजी यानि S.M.A.R.T .H.E.A.L.

smart heal

दोस्तों , आज का लेख है सफलता पर ..हर व्यक्ति आज सफल होना चाहता है ,हर व्यक्ति हर संभव कोशिश भी करता है , आपने देखा होगा कई बार हम उत्पादक काम करने की कोशिश करते हैं पर एन्ड ऑफ़ डे पर कुछ भी नहीं रहता हमारे पास .ये क्यों होता है ? यह विषय हमें हमेशा आतुर करता है और हम सही प्रयास और ठोस रणनीति के अभाव में अक्सर रेट की तरह फिसल जाते हैं ….      सबसे पहले जानना होगा की आखिर ये सफलता होती क्या है ,इच्छाओं की पूर्ति ,एक अच्छा दिन ,शांति ,परिवार या दोस्तों के साथ बिताया गया समय ,और मनचाहा कार्य करने की आजादी?

यहाँ सबसे पहले आपके लिए जानना जरुरी है की आपके लिए सफलता के क्या मायने हैं यानि सबसे पहले सफलता को पहचानना जरुरी है ,किसी की सफलता दिन ,पूरे जीवन ,या अल्प या दीर्घकालिक दोनों ढंग से प्राप्त की जा सकती है ..इस विषय पर और भी लेख हैं आप उन्हें भी पढ़ सकते हैं ..

तो सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है की उसे पाने की योजना क्या है ..इसके दो चरण होते हैं

पहला चरण है

लक्ष्य का निर्धारण

और दूसरा चरण है

लक्ष्य का क्रियान्वयन

अमेरिकन मनोचिकित्सक एडविन लाके ने अपने लक्ष्य निर्धारण के सिद्धांत में लक्ष्य स्थापना और प्रेरणा के बीच का वर्णन किया है

  • लक्ष्य निर्धारण – हमे अपने लक्ष्य को स्मार्ट बनाना चाहिए  M.A.R.T. मतलब स्पेसिफिक ,मेसरेबल ,अचिवबल ,रियलिस्टिक और टाइम टार्गेटेड अर्थात  लक्ष्य विशिष्ट ,मापनीय ,प्राप्त करने योग्य ,वास्तविक और समय लक्षित होना चाहिए यदि लक्ष्य इन गुणों से परिपूर्ण होता है तो हमे आसानी होती है उस तक पहुंचने के लिए ..हमे यह भी आसानी होती है सपने और हक़ीक़त का पता लगाने में …
  • लक्ष्य का क्रियान्वयन – दूसरा चरण और भी महत्व पूर्ण है ..हम यहाँ बात करेंगे E.A.L. की ,हील यानि हेल्प ,educate योरसेल्फ ,एनालाइज और लर्न मतलब सहायता , स्वयं को शिक्षित करना ,अपनी क्षमता की पहचान करना और हमेशा कुछ नया सीखते रहना …इन चार चरणों में इसे बांट देने से अपनी राह स्पष्ट हो जाती है ..हमे कहाँ से पढ़ना है .किससे मदद लेनी है अपना स्वमूल्यांकन  और हमेशा सीखते जाने की आदत में ही सफलता का मंत्र है

कई लोगों का कहना है की जो काम २४ घण्टे में नहीं हो सकता ,वह कभी नहीं हो सकता ,यहाँ कई मत हैं …परन्तु हमे समझना यह है की हमे काम  को जल्दी शुरू करना है क्यूंकि  कार्य में देर हमेशा नुकसानदायक होता है कई बार अवसर हाथ से निकल जाते हैं

S.M.A.R.T – H.E.A.L

आइये स्मार्ट हील  के बारे में विस्तार से जानते हैं ..

S  मतलब स्पेसिफिक  (विशिष्ट लक्ष्य )-

हमेशा हमे अपने टारगेट या लक्ष्य को छोटे -छोटे उपलक्ष्यों में बांट देना चाहिए , हम केवल पसंद के आधार पर अपना लक्ष्य नहीं चुन सकते कुछ कार्य आनंद दायक बिलकुल नहीं होते किन्तु आवश्यक होते हैं अतः उनको करना ही है

M  मतलब मेजरेबल (मापनीय  )-

अपने टारगेट या लक्ष्य को छोटे -छोटे उपलक्ष्यों में बांट देने के बाद एक और सूची तैयार करना चाहिए जिससे अपनी प्रगति पर हम अपनी नजर बनाये रख सकें और उसे माप सके ,क्या करना है ? कैसे करना है ? जैसे ही कोई कार्य पूरा हो सूची से काट दें ..इस प्रक्रिया से जान पाएंगे की आप सफलता से कितने दूर है …

A मतलब अचिवबल  (प्राप्त करने योग्य )-

लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जिसे पाया जा सके ,साथ ही साथ अपने लक्ष्य को परखना चाहिए ,क्या यह आपको हर दिन सुबह जगाने के लिए प्रेरित करता है ,आसान लक्ष्य उतने प्रेरणादायक नहीं होते जितने कठिन लक्ष्य क्यूंकि एक कठिन लक्ष्य को हासिल करना उपलब्धि के समान लगता है क्यूंकि आपको उसको पाने के लिए एक्स्ट्रा करना होता है ,मेहनत करनी होती है

R मतलब रियलिस्टिक ( वास्तविक )-

लक्ष्य को चुनने से पहले खूब रिसर्च कर लें उसके बारे में सब कुछ जान लें ,,लक्ष्य चुनौती पूर्ण होना चाहिए किन्तु लार्जर दें लाइफ नहीं होना चाहिए ,कहीं ऐसा लक्ष्य न चुन लें जिसको हासिल ही नहीं किया जा सके

T मतलब टाइम टार्गेटेड  ( समय लक्षित  )-

लक्ष्य की समय सीमा तय करके उसको प्राप्त करने के लिए तुरंत जुट जाना चाहिए , क्यूंकि बिना समय निर्धारित किये कोई भी कार्य मुमकिन नहीं है और सफलता नहीं प्राप्त किया जा सकता ,आपको समय सीमा तय करने के बाद ही लक्ष्य के रास्ते पर विचार करना चाहिए

H मतलब हेल्प ( सहायता करें )-

अच्छे लोगों की कमी के बारे में शिकायत करने के बजाय स्वयं वैसे बनने की कोशिश करें जैसी आप उनसे अपेक्षा करते हैं . अपना दिल बड़ा रखें और दूसरों की सहायता करें ,लक्ष्य प्राप्ति के लिए दूसरों की सहायता लेने से न हिचकें ..

E मतलब एज्युकेट योरसेल्फ ( पढ़ें )-

सफल लोग महीने में एक नॉन फिक्शन किताब जरूर पढ़ते है ,कोई भी किताब ,पत्रिका ,टीका ,कहानी ,कवितायेँ , पोस्ट ,लेख जरूर पढ़े ..यू tube देखें , पढ़ा हुआ कभी व्यर्थ नहीं जाता

A मतलब एनालाइज ( विश्लेषण ) –

हमको या आपको किसी भी कार्य करने के बाद उसका तुरंत विश्लेषण करें ,क्या वह काम उसी तरह हुआ है जैसा सोचा हुआ था ? क्या मेरा प्रयास शत प्रतिशत था ? क्या और बेहतर किया जा सकता था ? क्या गलतिया हुई या की ? क्या बहुत अच्छा किया ? इस प्रक्रिया से आप अपनी कार्यशैली को और बेहतर तरीके से समझ पाएंगे

Lमतलब लर्न  ( हर दिन नया सीखे  )-

हमको या आपको हर दिन कुछ नया सीखने की आदत डाल लेनी चाहिए यह एक नयी भाषा हो सकती है ,कोई नया शब्द हो सकता है ,किसी की जीवनी हो सकती है …यह बहुत ही महत्वपूर्ण है की आप कुछ न कुछ नया सीखें ..इस तरह आप अपना हर दिन मूल्यवान बना सकते हैं ..जैसा आप जानते है की सीखने की कोई उम्र नहीं होती कोई समय नहीं होता ….

तो आइये दोस्तों फिर नयी कोशिश करते हैं ..अपने सफलता की ओर………….

अच्छा लगे तो कमेंट जरूर करें कोई प्रश्न हो तो अवश्य पूछे मुझे भी सीखने का मौका मिलता है और आपको भी

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