What we lost today? – आज हमने क्या खोया?

दोस्तों , आइये आज एक कहानी से रुबरु होते है , जब ये कहानी मैंने पहली बार पढ़ा उसी वक्त ये ख्याल आया कि ये आप के लिए ही है ..क्यूँ आप को सुनाऊ….बात सर्द जनवरी कि है  स्थान अमेरिका के वाशिंगटन शहर का एक मेट्रो स्टेशन….

जहाँ एक व्यक्ति ने एक घंटा वायलिन बजाया और देखा कि लगभग १०००  लोग इस दौरान वहाँ से गुजरेसुबह का वक़्त होने के नाते अधिकतर लोग अपने काम पर जा रहे थे

जब उस व्यक्ति ने वायलिन बजाना शुरू किया उसके तीन मिनट बाद एक बुजुर्ग का ध्यान उस पर गया वह कुछ देर वहाँ रुका और चला गया …. मिनट  बाद उस व्यक्ति के पास एक महिला रुकी और एक सिक्का उसकी टोपी में डाला और चली गयी

मिनट बाद एक युवक रुका और थोड़ी देर तक सुनने के बाद वो भी चला गया ….

१० मिनट बाद एक बच्चा वहाँ रुक गया परन्तु उसकी माँ उसके घसीटते हुए ले गयीकई बच्चो ने ऐसा किया हर बार उनके अभिभावक उनको ले गए  

४५ मिनट होने के बाद भी वह बजाता रहा ..और इस बीच कुल ६ लोग रुके ..लगभग २० लोंगों ने सिक्का फेका ..रुके बगैर .

उस व्यक्ति को कुल ३२ डॉलर मिले उस दिन…१ घंटे बाद उसने वायलिन बजाना बंद किया इस दौरान उस पर किसी का ध्यान नहीं गया ….किसी ने अब तक कोई तारीफ़ नहीं कि थी  

अब इस कहानी का दूसरा पहलू देखें …

उस दिन उस व्यक्ति को किसी ने नहीं पहचाना …वह विश्व के महानतम वायलिन वादकों में से एक “जोशुआ बेल ” था  , उस दिन जोशुआ बेल  १६ करोड़ रूपये कि अपनी वायलिन से इतिहास कि सबसे कठिन  धुनो में से एक बजा  रहे थे …सिर्फ दो दिन पहले ही उन्होंने बोस्टन शहर   में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत किया था जहाँ प्रवेश शुल्क ही १०० डॉलर औसत मूल्य का था .

उस दिन जोशुआ बेल एक प्रसिद्ध समाचार पत्र Washington  post  दवरा कराये गए प्रयोग का हिस्सा बने थे जिसका उद्देश्य जानना था कि किसी सार्वजनिक स्थान पर किसी अटपटे समय में हम ख़ास बातों और ख़ास चीजों पर कितना ध्यान  देते हैं? क्या हम सराहना करते हैं ? क्या हम आम अवसरों पर प्रतिभा कि पहचान कर पाते हैं ?

 

मोरल ऑफ़ स्टोरी —-

जब दुनिया का सर्वश्रेष्ठ  वादक एक बेहतरीन वायलिन से इतिहास कि सबसे कठिन धुनो में से एक बजा रहा था तब हमारे पास इतना समय नहीं था कि कुछ देर रूककर उसको सुन सके ..सोचिये आप और हम कितनी ऐसी बातों से वंचित हो जाते होंगे …

या लगातार वंचित हो रहे हैं …

अतः आइये दोस्तों

“कुछ पल शांत बैठिये और सोचिये कि जिंदगी कि इतने भागदौड़ में हम कितनी खूबसूरत चीजे मिस कर देते हैं “.  

santosh 

Santosh Pandey

www.santoshpandey.in

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