लक्ष्य अधूरे क्यों रह जाते हैं

Why the goals remain incomplete in Hindi


दोस्तों, लक्ष्य हम सब बनाते हैं किसी के लक्ष्य पूर्ण होते हैं किसी के अधूरे रह जाते हैं तो किसी के देर से पूर्ण होते है आज हम इसी विषय की चर्चा करेंगे की क्या कारण है इसके पीछे …जैसा आप सभी जानते हैं की कहानी के माध्यम से कठिन से कठिन बात आसानी से समझ में आ जाती है ..तो मैं भी इसी विधा का प्रयोग करूँगा ..तो आइये विषय को लम्बा न खींचते हुए सबसे पहले कहानी को सुनते हैं पढ़ते है और समझने का प्रयास भी करते हैं ….

शस्त्र विद्या का एक विद्यार्थी अपने गुरु के पास गया। उसने अपने गुरु से विनम्रतापूर्वक पूछा – “मैं आपसे शस्त्र विद्या सीखना चाहता हूँ। इसमें मुझे पूरी तरह निपुण होने में कितना समय लगेगा?”गुरु ने कहा – “12वर्ष।” विद्यार्थी ने फ़िर पूछा – “लेकिन मैं इससे भी पहले इसमें निपुण होना चाहता हूँ। मैं कठोर परिश्रम करूँगा। मैं प्रतिदिन अभ्यास करूँगा भले ही मुझे 10 घंटे या इससे भी अधिक समय लग जाए। तब मुझे कितना समय लगेगा?” गुरु ने कुछ क्षण सोचा, फ़िर बोले – “25 वर्ष।”

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महत्वाकांक्षी और प्राप्त करने योग्य कैरियर लक्ष्य कैसे सेट करें (उदाहरणों के साथ)

गुरु का यह कथन हमारी जिंदगी में भी लागू होता है| यह मनुष्य की स्वभाविक प्रकृति है कि अगर वह जैसा सोचता है वैसा नहीं होता तो वह दुःखी हो जाता है| जब हम अपने द्वारा बनाये हुए लक्ष्य (TARGET) को ही पूरा नहीं कर पाते तो हमारा आत्मविश्वास डगमगाने लगता है|

जब हमारे लक्ष्य पूरे होते दिखाई नहीं देते तो हमारे पास दो उपाय होता है – या तो लक्ष्य को बदल दो और या फिर समय सीमा को बढ़ा दो| ये दोनों ही उपाय हमारे आत्मविश्वास को कम कर देते है इसलिए बेहतर यही होता है लक्ष्य व्यावहारिक होने चाहिए|
लक्ष्य S.M.A.R.T. होना चाहिए- SMART लक्ष्य का मतलब है –
• Specific(स्पष्ट)
• Measurable (मापां जा सकने योग्य)
• Achievable (प्राप्त किया जा सके)
• Realistic (वास्तविक)
• Time-Bound (निर्धारित समय सीमा में पूरा होने लायक)

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लेकिन हम में से ज्यादात्तर लोगों की समस्या यह है कि हमारे पास पर्याप्त समय होते हुए भी हम लक्ष्य को जल्दी से जल्दी प्राप्त करना चाहते है या फिर ऐसे लक्ष्य बना लेते है जो व्यावहारिक नहीं होते और उन्हें पूरा करने के लिए हमें दिन रात एक करना होता है|
हम ऐसे लक्ष्य तो बना लेते है लेकिन अन्दर ही अन्दर हमें ऐसा लगता है कि हम इस लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकते और इसका नतीजा यह होता है कि हम एक दो दिन तो उस लक्ष्य के लिए जी तोड़ मेहनत करते है लेकिन एक दो दिन के बाद हमें वह लक्ष्य एक परेशानी लगने लगती है|

क्या करें जब आप निर्णय न ले सकें ?

हम गलत धारणाएँ (Wrong Beliefs) बना लेते है और हमें इसी कारण कोई कार्य मुश्किल या असंभव लगता है|
हम आज जो भी है वह हमारी सोच का ही परिणाम है| हम जैसा सोचते है, वैसा बन जाते है “असंभव” या “नामुमकिन” हमारी सोच का ही परिणाम है|
“हमारे साथ वैसा ही होता है जैसा हम मानते है और विश्वास करते है|”
अगर हम मानते है और स्वंय पर यह विश्वास करते है कि हम कुछ भी कर सकते है तो हमारे लिए नामुमकिन कुछ भी नही

वैज्ञानिकों के अनुसार भौंरे का शरीर बहुत भारी होता है| इसलिए विज्ञान के नियमो के अनुसार वह उड़ नहीं सकता| लेकिन भौंरे को इस बात का पता नहीं होता एंव वह यह मानता है की वह उड़ सकता है| इसलिए वह लगातार कोशिश करता जाता है और बार-बार असफल होने पर भी वह हार नहीं मानता क्योंकि वह यही सोचता है कि वह उड़ सकता है| आखिरकार भौंरा उड़ने में सफल हो ही जाता है| भौरा विज्ञान के नियमों के अनुसार उड़ नहीं सकता लेकिन वह मानता है कि वह उड़ सकता है इसलिए वह उड़ जाता है


बिना कड़ी मेहनत किये सफलता कैसे ?

वनडे क्रिकेट के इतने बड़े इतिहास में वर्ष 2010 तक एक भी दोहरा शतक नहीं लगा लेकिन वर्ष 2010 में सचिन तेंदुलकर के दोहरा शतक लगाने के 4-5 वर्षों में ही 7 और दोहरे शतक (Double Centuries) लग गए| क्या यह मात्र संयोग था? ऐसा क्यों हुआ?
ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि 2010 से पहले जब किसी ने दोहरा शतक नहीं लगाया था तो सभी की मानसिकता यही थी कि दोहरा शतक लगाना बहुत ही मुश्किल है| क्योंकि अभी तक इस रिकॉर्ड को किसी ने नहीं तोडा था तो यह नामुमकिन सा लगता था| लेकिन जब सचिन ने दोहरा शतक लगाया तो सभी की मानसिकता बदल गयी और यह लगने लगा कि दोहरा शतक लगाना मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं|

इस दुनिया में नामुमकिन कुछ भी नहीं नामुमकिन” हमारा भ्रम या गलत मान्यता है जो आख़िरकार गलत साबित होती है|दोस्तों इस जीवन में नामुमकिन कुछ भी नहीं नामुनकिन शब्द मनुष्य ने ही बनाया है| जब टेलीफोन और रेडियो आदि का आविष्कार नहीं हुआ था तो दुनिया और विज्ञान यही मानते थे कि आवाज को कुछ ही समय में सैकड़ो किलोमीटर दूर पहुँचाना नामुमकिन है, लेकिन आज मोबाइल हमारे जीवन का हिस्सा है| इसी तरह जब तक विमान का आविष्कार नहीं हुआ था तब तक विज्ञान जगत भी यही मानता था कि मनुष्य के लिए आकाश में उड़ना संभव नहीं लेकिन जब राइट बंधुओं ने विमान का आविष्कार किया तो यह “असंभव”, “संभव” में बदल गया “हम वो सब कर सकते है जो हम सोच सकते है और हम वो सब सोच सकते है जो आज तक हमने नहीं सोचा”

 

Achieving Goals by Improving Your Character in hindi

कबीर दास जी का एक दोहा काफी प्रचलित है – “धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय|” अर्थ:- कबीर दास जी कहते है कि हमेशा धैर्य से काम लेना चाहिए| अगर माली एक दिन में सौ घड़े भी सींच लेगा तो भी फल तो ऋतु आने पर ही लगेंगे| इसलिए बेहतर यही है कि धैर्य से काम लिया जाए और व्यावहारिक लक्ष्य रखें जाएँ क्योंकि जब आप अपने छोटे से छोटे लक्ष्य को भी हासिल कर लेते है तो यह आपका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा देता है जिससे हमारी कार्यक्षमता बढ़ जाती है और हम तय लक्ष्य से ज्यादा हासिल कर पाते है|

आशा है कहानी का सार भी आप समझ गए होंगे ..आप दूसरों के लिए भी ,ट्विटर ,फेसबुक ,व्हाट्सप्प इत्यादि पर शेयर करेंगे ,कमेंट करेंगे …

Santosh Pandey

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One thought on “लक्ष्य अधूरे क्यों रह जाते हैं

  • June , 2018 at 11:51 am
    Permalink

    Dear Abhishek , vinay , prakash , nipurn, anu, rajesh singh , vivek , akhilesh , anuj , Ramakant ji , krishnakumar , sukriti , nihal , kashish , akash , jaypal , kiratn ji , mrinal , shekhavat ji , vipin sahoo, kaushal08 , nikunj , sheshkumar , suresh , ziyali , badboys02 , kunal , harsh ,suyalji , bhavesh … aap sabhi ko mail likhne ke liye bahut bahut dhnyavaad ..kripya aapse nivedan hai ki mail ke saath saath comment box me apne sujhav likhen jisse aur sabhi pathkon ko laabh mil sake..fir se aapka sukriya

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